परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 875 आ जरा घुल-मिल लेते हैं गुरु जी हमें निराकुल कर ही देते हैं जयतु गुरुवरम् जय विद्या सागरम् ।।स्थापना।। जरा सा दृग्-जल लेते हैं निराशा अपहर लेते हैं गुरु […]
-
Recent Posts
Recent Comments
