परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 995 गुरुवर लेते अवतार करने भक्तों को पार भटकन संसार से दुख पारावार से करने भक्तों को पार गुरुवर लेते अवतार ।।स्थापना।। गंगा नदिया का नीर लाया जल सागर क्षीर […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 995 गुरुवर लेते अवतार करने भक्तों को पार भटकन संसार से दुख पारावार से करने भक्तों को पार गुरुवर लेते अवतार ।।स्थापना।। गंगा नदिया का नीर लाया जल सागर क्षीर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 994 तेरी मुस्कान पे, बारी जाऊँ मैं बारी जाऊँ मैं, बलिहारी जाऊँ मैं किये अहसान पे दिये पड़गान पे तेरी मुस्कान पे, बारी जाऊँ मैं बारी जाऊँ मैं, बलिहारी जाऊँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 993 कलजुग तुम एक गुपाला । मोहन है नाम तिहारा ।। मय्यूर पंख तुम रखते । गज-रेख, शंख तुम फबते ॥ तुम ही पूर्णायु प्रणेता । जित-चितवन ! ऊरध-रेता ।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 992 तुम पूरण मनो-काम विश्वास दूसरे नाम मां श्री मन्त नन्दनम् वन्दनम्, कोटिक प्रणाम ।।स्थापना।। लाया चरणन जल गंग लो रंग केशरिया रंग तुम पूरण मनो-काम विश्वास दूसरे नाम मां […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 991 करुणा के निधान तुम जैन धर्म की शान तुम अय ! आँख नम हम भक्तों के भगवान् तुम ।।स्थापना।। आया मैं नैन सजल लाया मैं गंगा जल करुणा के […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 990 बन के लहू मेरी रगों में बहते होसिर्फ एक तुममेरे मन में रहते होहै फक्र मुझे इस बात का ‘के गली गली जिक्र इस बात काबन के लहू मेरी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 989 मेरा मन विराजे तुम चरण में तुम चरण विराजें मेरे मन में उम्र भर जन्म हर और न बस, इतना कर दो मेरे गुरुवर ‘के तुम चरण विराजें मेरे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 988 भाग्य विधाता है तू किमिच्छ दाता है और मेरा माँगने से नाता है तू मेरा भाग्य विधाता है ।।स्थापना।। मेरे पास और ज्यादा तो कुछ नहीं बस ये दृग्-जल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 987 कहीं और न जाऊँगा लेकर के मैं अपना रोना और जाऊँ भी हो कहाँ तुम अकेले ही जो मेरे हो ना कृपा बरसा भी दो ना ।।स्थापना।। था आया […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 986 तुम कृपा बरसाते पुकारा आ जाते कब लगाते देरी आँख नमतर तेरी ।।स्थापना।। भेंटते जल गगरी दया तेरी विरली तुम कृपा बरसाते पुकारा आ जाते कब लगाते देरी आँख […]
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