परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1005 जैसे माँ को बच्चे प्यारे प्यारे गुरु को बच्चे सारे गुरु धरती के देव कहाते आ पूजा गुरुदेव रचाते ।।स्थापना।। नीर क्षीर-सागर ले आते आ पूजा गुरुदेव रचाते जैसे […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1005 जैसे माँ को बच्चे प्यारे प्यारे गुरु को बच्चे सारे गुरु धरती के देव कहाते आ पूजा गुरुदेव रचाते ।।स्थापना।। नीर क्षीर-सागर ले आते आ पूजा गुरुदेव रचाते जैसे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1004 भव सिन्धु पार पाना आसान बड़ा बस आशा न बढ़ा आ शान बढ़ा गुरु भक्ति इक ठिकाना जो भव सिन्धु पार पाना ।।स्थापना।। गुरु चरणों में आओ मन जल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1003 बच्चों की बात मानते गुरु जी मन पढ़ना जानते गुरु जी खुद के समान हैं दया, क्षमा, करुणा निधान हैं ।।स्थापना।। आओ गुरु चरणन आओ लाओ जल कंचन लाओ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1002 दूर तेरी पूजा लेते ही तेरा नाम बनते हैं बिगड़े काम मेरे भगवन् ! तुम्हे मेरे अनगिन प्रणाम ।।स्थापना।। दूर पूरी पूजा चढ़ाते ही जल क्षीर बन चलती है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1001 लाती चेहरे नूर है दूर करती गुरुर है गुरु पूजा आ मनुआ ‘रे आ मनुआ करते हम मिलकर श्री गुरुवर पूजा ।।स्थापना।। ला मनुआ ‘रे आ मनुआ जल गंगा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 1000 भक्तों के ऊपर गुरु कृपा बरसती है, छप्पर फाड़-कर दिन-दिन, रात-रात भर भक्तों के ऊपर गुरु कृपा बरसती है, छप्पर फाड़-कर ।।स्थापना।। जो भक्त होगा वो क्यूँ न चढ़ायेगा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 999 जीवेत शत-शरद् जीवेत शत-शरद् कह रहा कोन-कोन न कह रहा कौन-कौन साथ श्रद्धा सुमन ले हृदय गदगद कह रहा कोन-कोन न कह रहा कौन-कौन जीवेत शत-शरद् जीवेत शत-शरद् ।।स्थापना।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 998 सम्यक् तप त्याग हिमालय चलते-फिरते ग्रन्थालय जयतु जयतु जय जयतु जयतु जय जय जय, जयतु जयतु जय, जय जय जय विद्या जय, जय विद्या जय चलते-फिरते ग्रन्थालय सम्यक् तप […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 997 करुणा रग-रग बहती अवतार दया कहती मय्यूर पंख पीछी तुम हाथ खूब फबती अवतार दया कहती करुणा रग-रग बहती ।।स्थापना।। रतनारी छव न्यारी मैं लाया जल झारी उमड़े श्रद्धा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 996 मेरी श्रद्धा, तुम पे गहराती है तुम्हें एक जो सोना और माटी है ‘जि गुरुजी, मेरी भक्ति मेरी श्रद्धा, तुम पे गहराती है तुम्हें एक जो सोना और माटी […]
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