धर्म नाथ आरती धर्म नाथ-जय, धर्मनाथ-जय, धर्म नाथ जय, धर्मनाथ आरती उतारुँ मैं, ढ़ोलक मजीरे साथ लिये घृत दीपक हाथ, आरती उतारूँ मैं, ढ़ोलक मजीरे साथ माँ सुप्रभा दृग् सितार । नृप भानु-राजा दुलार ।। श्रृंगार कुरु वंश माथ । […]

धर्म नाथ आरती धर्म नाथ-जय, धर्मनाथ-जय, धर्म नाथ जय, धर्मनाथ आरती उतारुँ मैं, ढ़ोलक मजीरे साथ लिये घृत दीपक हाथ, आरती उतारूँ मैं, ढ़ोलक मजीरे साथ माँ सुप्रभा दृग् सितार । नृप भानु-राजा दुलार ।। श्रृंगार कुरु वंश माथ । […]
अनन्त नाथ आरती नन्त भगवन्त आरती । जन्म मानव सँवारती । पार भव-जल उतारती ।। सन्त-निर्ग्रन्थ आरती ।। आओ उतारे आरतिया । पहली गरभ की । बरसा रतन की । सोला सुपन की ।। नन्त भगवन् की । आओ निहारे […]
विमल नाथ आरती लाओ दीपों को थरिया उतारो मिल के आरतिया भगवन् विमल शिव सारथिया नयन सजल भगवन् विमल लाओ दीपों को थरिया उतारो मिल के आरतिया भगवन् विमल शिव सारथिया पहली आरतिया गर्भ अनोखी । माँ सपने अपने, झिर […]
वासु-पूज्य आरती वासुपूज देव देव करे सेव आरती उतारें हम भी सदैव सोने की थाल दीप घी प्रजाल आरती उतारें हम भी सदैव आरतिया पहली गर्भ अनोखी बरसा रत्नों की ‘रे बरसा रत्नों की स्वर्ग से उतर के करते हैं […]
श्रेयो-नाथ आरती आओ ‘री आओ ‘री सखि आओ ‘री आओ ‘री थाल सजाओ ‘री दीप जगाओ ‘री आओ ‘री आओ ‘री आरती करें जिन श्रेयस् संकट हरें आओ ‘री आरती करें पहली आरती गर्भ कल्याणा । बरसा नभ मण माणिक […]
शीतलनाथ आरती कर्पूरी बतिया सोने की थरिया पून शश उजाला रतन दीप माला शीतल प्रभु की आरतिया मैं तो उतारूँ ‘रे ‘मैं’ को संहारूँ ‘रे आरतिया पहली रत्न झिर रुपहली हुये अपने सपने मैय्या आरतिया दूजी किलकारी गूँजी न्हवन सुमेर […]
सुविधि नाथ आरती भक्ति ले करके आँखों में दीप ले करके हाथों में आओ आओ हम सभी, जिन सुविध आरती करते हैं जिन सुविध संकट हरते हैं सुनते हैं, सुनते हैं, सुनते हैं जिन सुविध संकट हरते हैं गर्भ पर्व […]
चन्द्र प्रभ आरती ऐरा नन्दा । बाबा चन्दा ।। जयतु जयतु जय जयतु जिनन्दा ।। स्वर्ण सुगंधा । पाप निकन्दा । जयतु जयतु जय जयतु जिनन्दा ।। दीप हाथ ले । भक्ति साथ ले । करूँ आरती मैं सानन्दा ।। […]
सुपार्श्व नाथ आरती जिनेन्द्रम् सुपारस, जिनेन्द्रम् सुपारस । सदा यूँहि बरसाते रहना कृपा बस ।। लिये दीप आया शरण में तुम्हारी । तुम्हीं से लगी है लगन ये हमारी ।। अबै लौं निभाई, निभा देना आगे । कभी भी ना […]
पद्म-प्रभ आरती जयतु जय जय पद्मप्-प्रभ देव । सतत शत इन्द्र खड़े हित सेव ।। ओ’जि ले अपने-अपने हाथ । स्वर्ण दीपों की रत्न परात ।। आरती मैं भी करूँ सदैव । स्वर्ण दीपों की रत्न परात ।। सुुनो ‘जि […]
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