परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक 100 पर हित एक साधना,जिनका काम है ।छुपा भले नामों में, जिनका नाम है ॥रहे दूसरी कक्षा के,पढ़ने वाले ।श्री गुरु विद्या सागर तिन्हें ,प्रणाम है ।।स्थापना।। पता न दूर […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक 100 पर हित एक साधना,जिनका काम है ।छुपा भले नामों में, जिनका नाम है ॥रहे दूसरी कक्षा के,पढ़ने वाले ।श्री गुरु विद्या सागर तिन्हें ,प्रणाम है ।।स्थापना।। पता न दूर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 99 पत्थर मील दिखे न जिनको, दीख पड़े मंजिल आती । चूॅंकि एक मंजिल सब चाहें, जिन्हें बना लेना साथी ।। रूठ सके ना ग्राहक ऐसी, दिव्य कला सीखी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक – 98 सत्य यही,शिव यही,यही इक,सुन्दर जग-जन में ।कहता कौन ? न सागर जन्मे,दरिया जीवन में ।।मूक प्राणियों ने कह अपना,जिन्हें पुकारा है ।गुरु विद्या सागर चरणों में,नमन हमारा है ।।स्थापना।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 97 बिन वैशाखी पद रखने की, आदत जिन्हें पुरानी है । ग्राम सदलगा की माटी से, जनकी शुरु कहानी है ॥ जिनका जरा मुस्कुरा जाना, मानो फूलों की बरसा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 96 बिन तुम्हारे मैं कुछ भी नहीं हूॅं । हो सहारे । तुम हमारे ।। बिन तुम्हारे मैं कुछ भी नहीं हूॅं ।।स्थापना।। भले न आये वीर भोर पर, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 95 तॉंता लगा न रहता यूॅं ही,श्री गुरु के द्वारे । शरण सहारे,श्री गुरु देव चरण तारण हारे ।। कहती दुनिया सारी है । राय न सिर्फ हमारी है […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक -94 सिवा आपके इस दुनिया में, कोई नहीं हमारा है । आ भी जाओ मेरे भगवन् , तेरा सिर्फ सहारा है ।। आप कृपा बिन में भटका हूॅं, गति-लख चौरासी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 93 सूनी वेदी सुनो,चले आओ ।मन निवसो,चरण निवसाओ ।।गुरुवर हमारे ।प्राणों से प्यारे ।।गुरु ज्ञान सागर कृत-चेतन सितारे ।पानी कहाँ आँख अब मत रुलाओ ।।सूनी वेदी सुनो,चले आओ ।मन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक 92 तेरा हिवरा, है इतना कितना बड़ा, समाया सारा संसार है । फिर भी खुला तेरा दरबार है ।। कम न ये, इक चमत्कार है ।। तेरा हिवरा, है इतना […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 91 गुरु का नाम लो । सुबहो-शाम भो ।। गुरु बिन कोई न दूजा हमारा, गुरु आशीष एक कलजुग सहारा ।।स्थापना।। क्षीर के जल से । लिये भर कलशे […]
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