परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 290 ==हाईकू== छत्रछाँव पा जाँऊ जो थारी, जाऊँ तो बारी-बारी ।।स्थापना ।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई आया, रहा रो, साँई ।।जलं।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई लाया गंध ओ […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 290 ==हाईकू== छत्रछाँव पा जाँऊ जो थारी, जाऊँ तो बारी-बारी ।।स्थापना ।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई आया, रहा रो, साँई ।।जलं।। स्वीकारो, आज भी रोज घाँई लाया गंध ओ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 289 तुम्हें पा,मेरी कुटिया ने आखर अढ़ाई पढ़ा ।।स्थापना।। तुम्हें पा मेरी कुटिया पाई सुकूँ,दृग् जल भेंटूँ ।।जलं।। तुम्हें पा मेरी कुटिया द्यु-स्यंदन,भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। तुम्हें पा मेरी कुटिया पाई […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 288 ==हाईकू== घना अंधेरा न और कोई मेरा सहारा तेरा ।।स्थापना।। सच्चे मन से आये, ओ ! अपना लो उदक लाये ।।जलं।। गद-गद गिर् आये, ओ ! अपना लो चन्दन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 286 ==हाईकू== डाल दो, झोली में, हमार श्री गुरुजी चाँद चार ।।स्थापना ।। भेंटूँ नीर, आ जो सका आप ‘भक्ति-नौ-धा’-लकीर ।।जलं।। चन्दन भेंटूँ पुण्य नौ-धा भक्ति ‘कि फिर समेटूँ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 287 “हाईकू”तारण-हारेदो डाल झोली मेरीचाँद सितारे ।।स्थापना।। कृपा दृष्टि यूँ ही बनाये रखना,भिंगाऊँ नैना ।।जलं।। कृपा दृष्टि ‘कि रखना बनाये,ले चन्दन आये ।।चन्दनं।। कृपा-दृष्टि यूँ ही बनाये रखना सदा,भेंटूँ धाँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित क्रंमाक पूजन 285 “हाईकू”हूँ परेशाँदो सुलझा-उलझनमेरे भगवन् ।।स्थापना ।। ओ ! बदले, ‘कि दुनिया म्हारी, लिये जल की झारी ।।जलं।। ‘कि उड़ सके, पतंग म्हारी,लिये चन्दन झारी ।।चन्दनं।। जड़े तारे, ‘कि चूनर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 284 ==हाईकू== भूल भूलैय्या दो लगा पार नैय्या मेरे खिवैय्या ।।स्थापना।। करुणा कीजो, आये, उदक लाये अपना लीजो ।।जलं।। करुणा कीजो, आये, चन्दन लाये तनना छीजो ।।चन्दनं ।। करुणा कीजो, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 283 हाईकू आचार्य श्री जी अहो ! बदल मेरी भीदुनिया दो ।।स्थापना।। विघटे तम-मातम-गम, नीरभेंटते हम ।।जलं।। विघटे यम-जरा जनम, गन्धभेंटते हम ।।चन्दनं।। आना-जाना हो जाय खतम,सुधॉं भेंटते हम ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 282 ==हाईकू== गुरुजी ! कलि-बिछे काँटे बहुत ही, ले लो गोदी ।।स्थापना।। भेंटते जल, दो लगा किनारे ओ ! तारणहारे ।।जलं।। भेंटते गन्ध, दो लगा किनारे, ओ ! एक सहारे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 281 ==हाईकू== आईजो गुरु जी !आह्वाननसूना हृदयाँगन ।।स्थापना।। तुम्हें पढ़ना जो आँखें मेरी आईं,धारें भिंटाईं ।।जलं।। पढ़ना आया अच्छे से आँखें तुम्हें,भेंटूँ गंध तुम्हें ।।चन्दनं।। तुम्हें पढ़ना जो आईं आँखें […]
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point