परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 350 =हाईकू=उनके भाग जागे,होओ आ खड़े म्हारे भी आगे ।।स्थापना।। एक नजर तुमनें जो दी उठा,मना ‘जल’सा ।। जलं।। भेंटूँ गंधा,ये जो काली नज़र दी तुमने हटा ।।चन्दनं।। भेंटूँ धाँ,कालीं ये […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 350 =हाईकू=उनके भाग जागे,होओ आ खड़े म्हारे भी आगे ।।स्थापना।। एक नजर तुमनें जो दी उठा,मना ‘जल’सा ।। जलं।। भेंटूँ गंधा,ये जो काली नज़र दी तुमने हटा ।।चन्दनं।। भेंटूँ धाँ,कालीं ये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 349 -हाईकू- मिले उनको आहार, मेरी भी लो सुन पुकार ।।स्थापना।। भेंटूँ उदक, यूँ ही रोजाना पाने तेरी झलक ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, यूँ ही रोजाना पाने तेरा वन्दन ।।चन्दनं।। भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 348 =हाईकू= ‘जि मिली उन्हें, ‘नवधा-भक्ति’ कब मिलेगी हमें ।।स्थापना।। छल खो जाये, लाये जल कुछ तो कृपा हो जाये ।।जलं।। द्वन्द खो जाये, लाये गंध, कुछ तो कृपा हो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 346 “हाईकू” जिनकी गुरु ने सुन ली, उनकी लॉटरी खुली ।।स्थापना।। तुम्हें कि पाऊँ मना, लाया ‘दृग् जल, लीजो अपना ।।जलं।। तुम्हें कि पाऊँ मना, लाया चन्दन, भाँत चन्दना ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 347 =हाईकू=झूमे शबरी,ए ! राम मेरेअब बारी हमरी ।।स्थापना।। आये दृग् जल साथ‘अपना’सर रख दो हाथ ।।जलं।। आये चन्दन साथ‘अपना’कर लो ना दो बात ।।चन्दनं।। आये अक्षत साथ,‘अपना’दे भी दो आशीर्वाद […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 345 =हाईकू=जपे आपका नाम‘जी’ धक-धकआठों ही याम ।।स्थापना।। जुड़ने आप से हैं आये,साथ में दृग् जल लाये ।।जलं।। मिलने आप से हैं आये,साथ में चन्दन लाये ।।चन्दनं।। सुनने आप से हैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 344 हाईकू आये सेवा में,ओ !‘अपना’ सेवक लो बना हमें ।।स्थापना।। जल से भरा, बस यह घड़ा,लो अपना जरा ।।जलं।। अरमाँ मिरा, बस ये चन्दन,लो अपना जरा ।।चन्दनं।। सहारा तिरा, बस […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 343 हाईकू निहारो,थारे बिना,गुरु ‘जी’ सूना-सूनापधारो ! ।।स्थापना।। भेंटूँ उदक-सी जी, पाने ठण्डक,ए ! ‘जित-अख’ ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन-सी ही, पाने दमक,ए ! ‘जित-अख’ ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत-सी ही, पाने खनक,ए ! ‘जित-अख’ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 342 हाईकू थारे बिना ‘जि गुरु जीतन्हा तन्हा, मन आँगना ।।स्थापना।। भेंटूँ मैं जल, साथ श्रद्धा बेछोर,हाथों को जोड़ ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन मलयज मेैं घोर,हाथों को जोड़ ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत मैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 341 हाईकू उनमें से श्री गुरु,जिनके कामों से आती खुश्बू ।।स्थापना।। पाने अमनो चैन,लाये ये जल ले भींगे नैन ।।जलं।। जागने दिन रैन,लाये चन्दन ले भींगे नैन ।।चन्दनं।। पाने द्यु-काम धेन,लाये […]
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