परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 360 =हाईकू=आशु जिनके आँसु आ जाते,गुरु उनमें आते ।।स्थापना।। रख लो भक्तों की श्रृंखला में,जल ये, ‘दो गला मैं’ ।।जलं।। रख लो हंसों की श्रृंखला में,गंध ये, ‘दो गला मैं’ ।।चन्दनं।। […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 360 =हाईकू=आशु जिनके आँसु आ जाते,गुरु उनमें आते ।।स्थापना।। रख लो भक्तों की श्रृंखला में,जल ये, ‘दो गला मैं’ ।।जलं।। रख लो हंसों की श्रृंखला में,गंध ये, ‘दो गला मैं’ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 359 =हाईकू=तरु को किया सफल,दृग् अभी भी मेरे सजल ।।स्थापना।। झिरी चाँद से,वो सुधा लाये,तुम्हें मनाने आये ।।जलं।। उसी में घोर,चन्दन लाये,तुम्हें मनाने आये ।।चन्दनं।। उसी से सराबोर,धाँ लाये,तुम्हें मनाने आये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 358 *हाईकू*पलक तुम झलक क्या पाते,दृग् छलक आते ।।स्थापना।। रंग तेरे कि रँग पाऊँ,नैन-जल चढ़ाऊँ ।।जलं।। कह ‘कि मन की बात पाऊँ,घिस-गंध चढ़ाऊँ ।।चन्दनं।। झलक तेरी ‘कि रोज पाऊँ,शालि-धान चढ़ाऊँ ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 357 =हाईकू= करता प्रेम आपसे, मैं दीवाना मीरा के जैसे ।।स्थापना।। आपकी मिल पीछी जाये, ले भाव ये जल लाये ।।जलं।। पुरानी मिल पीछी जाये, ले भाव ये गंध लाये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 356 =हाईकू=जो पड़ जाते पीछे,‘गुरु’उनको ले चालें खींचे ।।स्थापना।। लिये उदक हुआ आना,झलक पाने रोजाना ।।जलं।। लिये चन्दन हुआ आना,दर्शन पाने रोजाना ।।चन्दनं।। ले शाली धान हुआ आना,मुस्कान पाने रोजाना ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 355 =हाईकू=जो आँचल न छोड़ें,‘गुरु’,उनका दिल न तोड़ें ।।स्थापना।। आसमाँ छुये पतंग,लाये भाव ये नीर संग ।।जलं।। मने त्यौहार रंग,लाये भाव ये चन्दन संग ।।चन्दनं।। भाये पद निःसंग,लाये भाव ये अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 354 =हाईकू = आये न तुम,खड़े रहे सँजो के ‘अर-माँ’ हम ।।स्थापना।। जल चढ़ाएँ,संजो दीवानी-मीरा सी भावनाएँ ।।जलं।। गंध भिटाएँ,सँजो बाला-चन्दन सी भावना है ।।चन्दनं।। सुधाँ चढ़ाएँ,सँजो नव-दीक्षार्थी सी भावनाएँ ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 353 ==हाईकू== हुआ अरसा पड़गाये तुम्हें, न भुलाओ हमें ।।स्थापना।। दो धरा सर-भार धरा, मैं जल ले द्वार खड़ा ।।जलं।। सुना, सुनते दुखड़ा, मैं चन्दन ले द्वार खड़ा ।।चन्दनं।। पतंग […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 352 ==हाईकू==मेरा भी मन,सँजो लाया मीरा सा दीवानापन ।।स्थापना।। प्रार्थना सुन,जल ये, व मुझे लो अपना चुन ।।जलं।। अरजी सुन,गंध ये, व मुझे लो अपना चुन ।।चन्दनं।। विनती सुन,सुधाँ ये, व […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 351 ==हाईकू==उनकी चाँदी सोना,आंगन म्हारा अभी भी सूना ।।स्थापना।। ढोक हजार,‘हमार’,लो स्वीकार दृग् जल-धार ।।जलं।। नन्त जुहार,‘हमार’लो स्वीकार चन्दन झार ।।चन्दनं।। नुति हजार,‘हमार’लो स्वीकार धाँ दाने चार ।।अक्षतं।। कोटि जुहार,‘हमार’लो स्वीकार […]
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