परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 470 -हाईकू- दे ‘हर-बच्चे-चेहरे’ दें मुस्कान, गुरु भगवान् ।।स्थापना।। सौधर्म वाला उदक न मिला, लो यही अपना ।।जलं।। चन्दन ‘वाला’ चन्दन न मिला, लो यही अपना ।।चन्दनं।। हरेक दाना अक्षत […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 470 -हाईकू- दे ‘हर-बच्चे-चेहरे’ दें मुस्कान, गुरु भगवान् ।।स्थापना।। सौधर्म वाला उदक न मिला, लो यही अपना ।।जलं।। चन्दन ‘वाला’ चन्दन न मिला, लो यही अपना ।।चन्दनं।। हरेक दाना अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 469 *हाईकू*करते तप तरु, करने-कर-सेवा श्री गुरु ।।स्थापना।। जल्दी जल्दी में आया,दृग् जल, जल जगह लाया ।।जलं।। जल्दी जल्दी में आया,हल्दी, चन्दन जगह लाया ।।चन्दनं।। जल्दी जल्दी में आया,टूट, अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 468 =हाईकू=गुरु,तंग न कर सके तपन,चाले पवन ।।स्थापना।। खोजा, न और कुछ पाया,आँखों में पानी ले आया ।।जलं।। खोजा, न और कुछ पाया,घोल के हल्दी ले आया ।।चन्दनं।। खोजा, न […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 467 =हाईकू= था चाहता, हूँ चाहता, मैं चाहूँगा भी, तूम्हें यूँ ही ।।स्थापना।। भाग दृग् जल सा पाने आये, दाग हटाने आये ।।जलं।। भाग चन्दन सा पाने आये, तुम्हें मनाने […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 466 =हाईकू= करने जन्म-चन्दन गुरु पाद-पद्म-वन्दन ।।स्थापना।। पा कृपा तोर, पार चौर हा ! नम मोर, दृग् कोर ।।जलं।। पहली, छोड़ मछली व्याध तीर, दृग् मोर नीर ।।चन्दनं।। भील छोड़ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 465 “हाईकू”मेरा-अमर नाम, किया गुरु जी का हर काम ।।स्थापना।। फूटे सुगन्धी वो नीर लाये, होने गंभीर आये ।।जलं।। फूटे सुगंधी वो गंध लाये,सोने सुगंध आये ।।चन्दनं।। फूटे सुगन्धी वो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 464 =हाईकू= गुरूर, अंतस्थ ‘र’ हटा, ‘कि गुरु-पन प्रकटा ।।स्थापना।। अबकी चीर सकने चीर, लाये कंचन नीर ।।जलं।। कमाने भाँत चन्दन जश, लाये चन्दन रस ।।चन्दनं।। पदवी शिव शाश्वत पाने, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 463 =हाईकू= जितने बौर-आम, तुम्हें उतने बार प्रणाम ।।स्थापना।। दृग् जल लाये, दृग् जल सा हितौर बहने आये ।।जलं।। चन्दन लाये, चन्दन सा शीतल बनने आये ।।चन्दनं।। अक्षत लाये, अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 462 “हाईकू” पा गये रंग तितली-‘पर’ श्याम ! हम भ्रमर ।।स्थापना।। जल निर्मल कंचन सा, दो दया की कर बर्सा ।।जलं।। लाया चन्दन ‘चंदन’-सा, दो दया की कर बर्सा ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 461 =हाईकू=वो फूल तुम,कभी न हो जिसकी मुस्कान-गुम ।।स्थापना।। आज को कल-सा न गवाने,जल लाये चढ़ाने ।।जलं।। खुश्बू जल के भी दे पाने,चन्दन लाये चढ़ाने ।।चन्दनं।। राज अक्षत पाने,चढ़ाने लाये अक्षत […]
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