परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 490 -हाईकू-है बड़ी जान, बात इसमें ‘कि हैं गुरु भगवान्।।स्थापना।। चन्दन पग पखारे, दृग् सजल मैं खड़ा द्वारे ।।जलं।। अंजन नभ बतियाये, हम भी चन्दन लाये ।।चन्दनं।। बुलबुल ने ‘पर’ […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 490 -हाईकू-है बड़ी जान, बात इसमें ‘कि हैं गुरु भगवान्।।स्थापना।। चन्दन पग पखारे, दृग् सजल मैं खड़ा द्वारे ।।जलं।। अंजन नभ बतियाये, हम भी चन्दन लाये ।।चन्दनं।। बुलबुल ने ‘पर’ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 489 =हाईकू=पाती आपको,गुरु-देव ‘जी’ स्लेट जाती साफ हो ।।स्थापना।। जन्म मृत्यु से पिण्ड छुड़ानेलाये जल चढ़ाने ।।जलं।। संसार ताप विहँसाने,चन्दन लाये चढ़ाने ।।चन्दनं।। अविनश्वर पद पाने,लाये धाँ-शाली चढ़ाने ।।अक्षतं।। काम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 488 =हाईकू=विशुद्धि जाती बढ़ती ही बढ़ती,‘पाय’ अतिथी ।।स्थापना।। दृग् जल लाया, सुना, आपको दुःख मेंटना आया ।।जलं।। चन्दन लाया, सुना, आपको खुश्बू भेंटना आया ।।चन्दनं।। अक्षत लाया, सुना, आपको भक्त […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 487 “हाईकू”तुम भी आना‘घर’ चाँद-सूरज आते रोजाना ।।स्थापना।। ‘के जन्म-जरा मरण देवें चल,चढ़ाते जल ।।जलं।। संताप पाये ‘शम-जल’,चढ़ाते घिस संदल ।।चन्दनं।। ले आश, पद अविचल,चढ़ाते धान धवल ।।अक्षतं।। काम-बाण ‘कि […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 486 *हाईकू* न उतरने पाता ‘रंग-श्री-गुरु’ जो चढ़ जाता ।।स्थापना।। भेंटूॅं जल मैं, सुन-आया, बिगड़ी बनाना तुम्हें ।।जलं।। भेंटूॅं चन्दन मैं, सुन-आया, आँसू पोंछना तुम्हें ।।चन्दनं।। भेंटूॅं अक्षत मैं, सुन-आया, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 485 =हाईकू=सुन लो ‘ना’,दो कर पावन घर-‘आ’ कोना-कोना ।।स्थापना।। भेंटूॅं मैं, जल तुम्हें,पायें दूरियाँ, ‘कि फितूरियाँ ।।जलं।। भेंटूॅं मैं,गंध तुम्हें,मुँह की खाएं,बुरी बलाएँ ।।चन्दनं।। भेंटूॅं मैं, धान तुम्हें,हो छूमन्तर, पाप […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 484 =हाईकू=कछु…आ-सान तो,गुरु मुस्कान वो,‘जा-ना’ ले ‘आ-ना’ ।।स्थापना।। भेंटूॅं मैं,जल तुम्हें,मुऊँ, फिर के न लजाऊँ मैं ।।जलं।। भेंटूॅं चन्दन तुम्हें,सापों को भी न ठुकराऊँ मैं ।।चन्दनं।। भेंटूॅं अक्षत तुम्हें,माँ अब […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक 483 =हाईकू=ओ ! ‘जि ओ ! सुन लो,‘अपने-भक्तों में’ हमें चुन लो ।।स्थापना।। भेंटूॅं मैं,जल तुम्हें,कम वक्तों से आने भक्तों में ।।जलं।। भेंटूॅं मैं,गंध तुम्हें,आने सग्रन्थों से, निर्ग्रन्थों में ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 482 =हाईकू= स्वप्न में, ‘जाते’ गुरु जिनके घर में, न दिन में ।।स्थापना।। भेंटूॅं मैं, नीर तुम्हें, आने कतार क्षीर आचार ।।जलं।। भेंटूॅं मैं, गंध तुम्हें, आने कतार, सन्त आगार […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 481 =हाईकू=सकल सन्तों को,नमो-ऽस्तु कल के भगवन्तों को ।।स्थापना।। भेंटूॅं जल मैं, लगाम रक्खूँ, होऊँ जो उतार में ।।जलं।। भेंटूॅं चन्दन मैं,आने महकते किरदार में ।।चन्दनं।। भेंटूॅं अक्षत मैं,जन्मने फिर […]
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