परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 511 हाईकू चुराई जाती, हँसी होंठो पे ‘ऋषि’ न यूँ ही आती ।।स्थापना।। पाप कपूर से धू-धू कर जायें, जल चढ़ायें ।।जलं।। भाव कि छू ‘भी’ तर सूनर जायें, गंध […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 511 हाईकू चुराई जाती, हँसी होंठो पे ‘ऋषि’ न यूँ ही आती ।।स्थापना।। पाप कपूर से धू-धू कर जायें, जल चढ़ायें ।।जलं।। भाव कि छू ‘भी’ तर सूनर जायें, गंध […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 509 “हाईकू”हँसना, ‘हँसें-बच्चे रोयें’रोवना, माँएँ आईना ।।स्थापना।। पदवी पाने अविचलश्री गुरु ! भेंटूँ ये जल ।।जलं।। पदवी पाने निरंजन, श्री गुरु ! भेंटूँ ये चन्दन ।।चन्दनं।। पदवी पाने शाश्वत, सिरी-गुरु […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 508 *हाईकू*‘और-छोड़ के’ बुलाते, आ जाते, श्री गुरु दौड़ के ।।स्थापना।। हो मृत्यंजय तुम,जल भेंटूँ, ‘कि हो मृत्यु गुम ।।जलं।। दूर ‘भौ-दाह’ तुम, गंध भेंटूँ, ‘कि हो चाह गुम ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 507 =हाईकू= राहत जख्म बच्चों के पा-ही जाएँ, जो फूँके माँएँ ।।स्थापना।। बढूँ, न लडूँ जल जैसा, मैं भेंटूँ जल कलशा ।।जलं।। महकूँ, जल भी चन्दन सा, भेंटूँ चन्दन घिसा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 506 हाईकू तुझपे आया है, ‘मन’ जा गहरे तू समाया है ।।स्थापना।। चंचलता खो जाये ‘के मन, भेंटूँ जल कंचन ।।जलं।। विकलता खो जाये ‘के मन, भेंटूँ घिस चन्दन ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 505 हाईकू अरिहन्त की निधि, देती है दिला, सन्त सन्निधि ।।स्थापना।। चढ़ाऊँ जल ये, चाह ले ‘बस’ तद्-गुण लब्धये ।।जलं।। भेंटूँ संदल ये चाह ले ‘बस’ तद्-गुण लब्धये ।।चन्दनं।। भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 504 हाईकू शरणा आये,‘सुन आपको पीड़ा’हरना आये ।।स्थापना।। ले आये जल हम,‘सुन-तू लेता’ सिर सितम ।।जलं।। लाये चन्दन हम,‘सुन-तू लेता’ भर जखम ।।चन्दनं।। लाये अक्षत हम,‘सुन-तू लेता’ चूँकि दृग् नम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 503 हाईकू हजार हाथ, उनके ‘होते साथ’ गुरु जिनके ।।स्थापना।। आ चरणों में, जल चढ़ा रहा, न जल बिलोने ।।जलं।। आ चरणों में, चन्दन चढ़ा रहा, आप सा होने ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 502 हाईकू है कोई, जहां दोई, बेनजीर,तो गुरु तस्वीर ।।स्थापना।। लो बना, खुद-सा जल ये अपना,कृपा करना ।।जलं।। लो बना, खुद-सा गंध ये अपना,वर्षा करुणा ।।चन्दनं।। लो बना, खुद-सा धान […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 501 हाईकू बदमाशियाँ छू कर दें,गुरु जी जादू कर दें ।।स्थापना।। दो लगा उस पार बेड़ा,जल ये मेरा स्वीकार करो ।।जलं।। दो कर सुखी घनेरा, चन्दन ये स्वीकार मेरा ।।चन्दनं।। […]
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