परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 570 =हाईकू =आनन्द होता अनन्त,करते ही वन्दना सन्त ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, चतुष्टय अनन्त कल ‘कि पाऊँ ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, अब बर्षा में ‘कि न करूँ रुदन ।।चन्दनं।। शालि धाँ भेंटूँ, […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 570 =हाईकू =आनन्द होता अनन्त,करते ही वन्दना सन्त ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, चतुष्टय अनन्त कल ‘कि पाऊँ ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, अब बर्षा में ‘कि न करूँ रुदन ।।चन्दनं।। शालि धाँ भेंटूँ, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 569 =हाईकू=गुरु-आशीष त्यों,जरूरी ‘जीवन-गाड़ी’ ग्रीस ज्यों ।।स्थापना।। आश ले ध्यान निश्चल,चरणन रखूँ दृग् जल ।।जलं।। आश ले सम्यक् दर्शन,चरणन रखूँ चन्दन ।। चन्दनं।। भेंटूँ धाँ-शाली अखण्डित, आश ले सम्यक् चरित […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 568 =हाईकू=तरु सरीखा,दानी जीवन किसी का,तो ऋषि का ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ चरणन,‘कि रीझे सम्यक् दर्शन ।।जलं।। चर्चूं चन्दन चरणन,‘कि रीझे स्वानुभवन ।।चन्दनं।। हेत मरण पण्डित, भेंटूँ शालि धाँ अखण्डित ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 567 =हाईकू=शरद चाँद पूनो, नुति, हित आनंद दूनो ।।स्थापना।। तुमने मुझे समझा जो अपना,भीगे नयना ।। जलं।। पा तुम्हें घर अपने दृग् भिंगाऊँ, गंध भिंटाऊँ ।।चन्दनं।। उतरा चाँद मेरा, मेरे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 566 =हाईकू=सन्तों का रूप धरकर,जमीं औ’तरे ईश्वर ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ओ वर्तमाँ-वर्धमाँ,दो छुवा आसमाँ ।।जलं।। भेंटूँ गंध,ओ ! सार्गिद इर्द-गिर्द, लो मेंट दर्द ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत, औ जुबाँ नौ-जबाँदो छुवा वो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 565 =हाईकू= गुरु वन्दन से, ‘सार-निकसे’ जो न मंथन से ।।स्थापना।। शरण तेरी आया, भक्ति अंधी दृग् सजल लाया ।।जलं।। शरण तेरी आया, स्वर्ण गगरी चन्दन लाया ।।चन्दनं।। शरण तेरी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 564 =हाईकू = आप बर्षाते हैं, ‘सुधा’ सिन्धु और तरसाते हैं ।।स्थापना।। तुम्हें प्रणाम, दृग् जल चढ़ाते ही, हाथ मुकाम ।।जलं।। तुम्हें प्रणाम, चन्दन चढ़ाते ही, था बना काम ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 563 =हाईकू = सिवा माँओं के जहान में, किसके बच्चे ध्यान में ।।स्थापना।। जन्म, यम के घर करने आया, दृग् जल लाया ।।जलं।। आताप जन्मों का विहरने आया, चन्दन लाया […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 562 =हाईकू =श्री गुरु आप रज चरण,माथे करूँ वरण ।।स्थापना।। भेंटूॅं जल, ओ रत्न चिन्तामणी ओ, मेरी सुनियो ।।जलं।। भेंटूॅं संदल, ओ जादुई छड़ी ओ,मेरी सुनियो ।।चन्दनं।। भेंटूॅं तण्डुल, ओ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 561 =हाईकू=भक्त लो बना हमें,‘के भोला-भाला चन्दन सा मैं ।।स्थापना।। भेंटूॅं जल,ओ ! मुझ चन्दन वीर, दो लगा तीर ।।जलं।। भेंटूॅं गंध,ओ ! मुझ-शबरी-राम, दो रॅंग शाम ।।चन्दनं।। भेंटूॅं धान,ओ […]
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