परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 600 हाईकूसुनते आप जगत् की, सुन चला आया ‘तुरत-ही ।।स्थापना।। आया द्वारे मैं तिहारे, ले जल, ए ! विश्वास म्हारे ।।जलं।। आया द्वारे मैं तिहारे,ले चन्दन कलशे न्यारे ।।चन्दनं।। आया […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 600 हाईकूसुनते आप जगत् की, सुन चला आया ‘तुरत-ही ।।स्थापना।। आया द्वारे मैं तिहारे, ले जल, ए ! विश्वास म्हारे ।।जलं।। आया द्वारे मैं तिहारे,ले चन्दन कलशे न्यारे ।।चन्दनं।। आया […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 599 हाईकू श्री गुरु दीया, ‘कि लौं लागी, अंधर बुराई भागी ।।स्थापना।। कर्तृ जन्मादि रोग-त्रय किनार, मैं छोड़ूॅं धार ।।जलं।। ओ ! भवाताप निकन्दन, चर्णन चर्चूं चन्दन ।।चन्दनं।। पद-अखण्ड दातार, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 598 हाईकूलगा, पा लिया भव-कूल,पा आप चरण धूल ।।स्थापना।। दृग्-जल पांव धुलाऊॅं,आज फूला नहीं समाऊँ ।।जलं।। घिस चन्दन ले आऊॅं,आज फूला नहीं समाऊँ ।।चन्दनं।। जी-भर-धान लुटाऊॅं,आज फूला नहीं समाऊँ ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 597 हाईकूआप चरणों की धूल छू, जन्मों की, हुई भूल ‘छू’ ।।स्थापना।। जल प्रासुक मैं छान लाया,हेत मुस्कान आया ।।जलं।। चन्दन आप समान लाया,हेत मुस्कान आया ।।चन्दनं।। फूटे सुगंध, ले […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 596 हाईकू आपकी चारु-चिबुक, मिले प्रभु से कुछ-कुछ ।।स्थापना।। चढ़ाई जल झारी, डर मन्तर-छू बलिहारी ।।जलं।। भेंटी चन्दन गगरी,पाई खुशी भाँति शबरी ।।चन्दनं।। भेंटी धाँ शालि, बलिहारी नाकाम नजर काली […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 595 हाईकू आपकी भ्रूओं-सा, न सुर धनु, ‘मैं ना’ कहे धेनु ।।स्थापना।। करूँ नम, दृग् जल से, पाँव तुम, ‘कि कृपा बर्से ।।जलं।। चन्दन घड़ा, मैं लिये खड़ा, तेरी ‘कि […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 594 हाईकू करा दीजिये सैर उस पार की, कर्ण धार जी ।।स्थापना।। स्वीकारो जल कण, तुमसे लागी मेरी लगन ।।जलं।। स्वीकारो गंध प्याली, तुमसे लागी है लौं हमारी ।।चन्दनं।। स्वीकारो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 592 हाईकूखाती गोटे, ‘कि पतंग उड़ जाये, सेवा में आये ।।स्थापना।। न्यारे हो तुम तिहु-जग से, पूजूँ सो जल-दृग् से ।।जलं।। जग भर से न्यारे तुम, चन्दन सो भेंटें हम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 593 हाईकू लागी लौं, गुरु से जिनकी उनकी पार लागी नौ ।। स्थापना।। साधारण सा, ये जल जो स्वीकार लिया, शुक्रिया ।।जलं।। घट-चन्दन, ये माटी जो स्वीकार लिया, शुक्रिया ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 591 “हाईकू”शंख-आवर्त वाली,ग्रीवा आपकी बड़ी निराली ।।स्थापना।। अश्रु जल से संमिश्रित, ये जल है समर्पित ।।जलं।। गंध इतर संमिश्रित, चन्दन ये समर्पित ।।चन्दनं।। भा और मोति संमिश्रित, ये शालि धाँ […]
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