परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 630 =हाईकू= ‘जि निहारो, ये दुखिया-कुटिया भी, कभी पधारो ।।स्थापना।। कर सकने, ये मन प्रांजल, मैं भेंटूॅं दृग्-जल ।।जलं।। कर सकने, ये मन निरंजन, भेंटूॅं चन्दन ।।चन्दनं।। कर सकने, ये […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 630 =हाईकू= ‘जि निहारो, ये दुखिया-कुटिया भी, कभी पधारो ।।स्थापना।। कर सकने, ये मन प्रांजल, मैं भेंटूॅं दृग्-जल ।।जलं।। कर सकने, ये मन निरंजन, भेंटूॅं चन्दन ।।चन्दनं।। कर सकने, ये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 629 =हाईकू=ए ! दूजे चाँद पूनम-शरद, आ कीजे मदद ।।स्थापना।। अखीर उड़ा सकने, ‘अबीर’, मैं भेंटूँ दृग्-नीर ।।जलं।। अखीर कर पाने सु-मरण, मैं भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। अखीर बीते ‘जै-वीर’-जपत, मैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 628 =हाईकू=आईये रहा बुला,इस कुटिया का द्वार खुला ।।स्थापना।। गफलतें जो ‘तूने छोड़ीं, सो भेंटूँ जल-कटोरी ।।जलं।। तूने किया धी-‘भी’ अभिनन्दनसो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। तुम्हें किसी का दिल दुखाना आया […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 627 =हाईकू= इस ओर भी, देख लिया करो ‘जि गुरु जी कभी ।।स्थापना।। आया दृग् नम, कर पाने खतम, फेर-जनम ।।जलं।। लाया चन्दन, ‘फेर भौ-भ्रमण’ हो उपशमन ।।चन्दनं।। लाया अक्षत, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 626 =हाईकू=बना ‘कि संघ पीछी-पंख, दो उड़ा मेरी पतंग ।।स्थापना।। गई पा, तीरा-मीरा, लिये नीर मैं भी द्वारे खड़ा ।।जलं।। गई पा, सोमा-धीरा, लिये गन्ध मैं भी द्वारे खड़ा ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 625 *हाईकू* मीरा दी तीरा लगा, नहीं पराया मैं भी आपका ।।स्थापना।। श्री-वाहन मैं, ज्ञाँ-कण बोने, आया, ‘जि जल लाया ।।जलं।। जी-पाहन मैं, माखन होने आया, चन्दन लाया ।।चन्दनं।। जी-रावन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 624 =हाईकू= शबरी सब पाई, आया-द्वारे मैं भी ऋषिराई ।।स्थापना।। पतझर मैं, सावन होने आया, उदक लाया ।।जलं।। कंश मैं, भाव-रावन खोने आया, चन्दन लाया ।।चन्दनं।। हा ! पामर मैं, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 623 हाईकूपानी कहां,दृग् हो सके जो भिंगोना,आ भी जाओ ना ।।स्थापना।। किया चन्दना उद्धार,ले जल मैं भी आया द्वार ।।जलं।। उतारा मीरा का भार,ले गंध मैं भी आया द्वार ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 622 हाईकू गलें शिकवे गिले, आप दर्शन से सुकूँ मिले ।।स्थापना।। निरख सकूँ, अन्तस् तस्वीर, भेंटूँ नैनन नीर ।।जलं।। कर सकूँ ‘गो-चरी’ अभिनन्दन, भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। हो सकूँ अन्त-अन्त-तक विरत, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 621 हाईकूहो किसी ने भी पुकारा, आ… आपने दिया सहारा ।।स्थापना।। खो सकूँ भाव-खिल पामर,भेंटूँ जल गागर ।।जलं।। खो सकूँ भाव तन राग-रंजन, भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। खो सकूँ भाव ईर्ष्या […]
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