परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 684 =हाईकू=भले सबके तुम, सिर्फोर-सिर्फ तुमरे हम ।।स्थापना।। लिये जल दे रहा ढोक, त्राहि माम्हा ! स्वार्थी लोक ।।जलं।। लें चन्दन दे रहा ढोक, त्राहि माम् हा ! माखी लोभ ।।चन्दनं।। […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 684 =हाईकू=भले सबके तुम, सिर्फोर-सिर्फ तुमरे हम ।।स्थापना।। लिये जल दे रहा ढोक, त्राहि माम्हा ! स्वार्थी लोक ।।जलं।। लें चन्दन दे रहा ढोक, त्राहि माम् हा ! माखी लोभ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 683 =हाईकू= बोल कड़वा भी लागे मीठा, कौन गुरु सारीखा ।।स्थापना।। सम्हार, भेंटूँ मैं आपके चरणों में, जल धार ।।जलं।। सहज, भेंटूँ मैं आपके चरणों में, मलयज ।।चन्दनं।। वर्धमाँ, भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 682 =हाईकू=बस, अंगुली श्री गुरु पकड़ी, ‘कि बनी बिगड़ी ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, भारी मनवा, बना ‘कि हल्का पाऊँ ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ,उलझा मन, बना उजला पाऊँ ।।चन्दनं।। सुधाँ चढ़ाऊँ, पामर मन,बना […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 681 =हाईकू=विद्या सागर सरीखे , कहाँ और सागर मीठे ।।स्थापना।। अर ! आपके श्री चरणों में, भेंटूँ, दृग्-जल गागर ।।जलं।। निरे ! आपके श्री चरणों में, भेंटूँ, चन्दन घडे़ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 680 =हाईकू=गुरु जी, देते आसमाँ छुवा, जमीं न छुड़ा, वाह… ।।स्थापना।। करुणा कीजे,जल, नैन सजल, अपना लीजे ।।जलं।। करुणा कीजे, सवन्दन,चन्दन,अपना लीजे ।।चन्दनं।। करुणा कीजे,ये धाँ, धाँ-कटोरे की, अपना लीजे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 679 =हाईकू= कारे किनारे, सिन्धु विद्या पै बहि-रन्तर न्यारे ।।स्थापना।। ‘कि न गति ही, कच्छपी ‘धी’ भी पाऊँ, जल चढ़ाऊँ ।।जलं।। ‘कि कछुवे सी गति-मति पाऊँ, ‘जि गंध चढ़ाऊँ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 678 =हाईकू=सिन्धु बेकार ही, विद्या सिन्धु तर रहे तार-भी ।।स्थापना।। कर सकने सफल अखीर, मैं भेंटूँ दृग्-नीर ।।जलं।। कर सकने ‘भी’ अभिनन्दन,मैं भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। कर सकने निंदक स्वागत, मैं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 677 =हाईकू=डराते, और सिन्धु, पै विद्या-सिन्धु डर भगाते ।।स्थापना।। दृग्-जल करूँ अर्पण, ‘कि आप सा छुऊँ गगन ।।जलं।। चन्दन करूँ अर्पण, ‘कि आप सा रहूँ मगन ।।चन्दनं।। अक्षत करूँ अर्पण, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 676 =हाईकू= सिर्फ इन्दु के सिन्धु, विद्या-सिन्धु न किन-के बन्धु ।।स्थापना।। पाने निजात्म एक झलक, आये, लाये उदक ।।जलं।। करने गुण अभिनन्दन, आये, लाये चन्दन ।।चन्दनं।। होना सहज ओ निराकुल, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 675 =हाईकू=सिन्धु ने गिनी-चुनी, दीं विद्या सिन्धु ने नन्त-धुनी ।।स्थापना।। भक्त-मंजिल ! चरणों में आपके भेंटूँ सलिल ।।जलं।। पाप भंजन ! चरणों में आपके भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। पत-राखत ! चरणों […]
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