परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 694 =हाईकू=कुछ भी नहीं मैं तेरा, सब कुछ तुहीं पै मेरा ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् जल, न उठाऊँ कॉलर, पानी पे लिख ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, न मचाऊँ पुन: ‘ कि रुदन-वन […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 694 =हाईकू=कुछ भी नहीं मैं तेरा, सब कुछ तुहीं पै मेरा ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् जल, न उठाऊँ कॉलर, पानी पे लिख ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, न मचाऊँ पुन: ‘ कि रुदन-वन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 693 -हाईकू-आ बचें जाने से नीचे, ‘लग पीछी वालों के पीछे ।।स्थापना।। आये रँगने भक्ति रंग में, लाये जल संग में ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ, रंग भक्त तुम्हारे ‘कि रॅंग पाऊँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 692 =हाईकू= जुबाँ कहते ही ‘गुरु जी’ हो जाती मीठी-गुड़-सी ।।स्थापना।। रक्खूँ पाँवन उदक, पाने आपकी एक झलक ।।जलं।। छुऊँ देहरी लिये चन्दन, पाने आप शरण ।।चन्दनं।। आया, करीब ले […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 691 *हाईकू*कभी ऐसा हो, हुआ, आप-आहार कहाँ, पता हो ।।स्थापना।। लिये सजल आँख मैं, स्वीकारिये, तारिये हमें ।।जलं।। लिये चन्दन पात्र में, स्वीकारिये,तारिये हमें ।।चन्दनं।। लिये अक्षत साथ में, स्वीकारिये,तारिये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 690 =हाईकू=गुरुदेवा !है न मेरा, और कोई भी तेरे सिवा ।।स्थापना।। सप्रेम भेंट, भरे जल से चारु-चारु कलशे ।।जलं।। सप्रेम भेंट, गिरि मलय-सार, खुशबू दार ।।चन्दनं।। सप्रेम भेंट,शाली-धाँ वाली, अति […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 689 =हाईकू=जुड़ी तुम्हीं से हर खुशी मेरी, ए ! जिन्दगी मेरी ।।स्थापना।। ‘आये बनने’, सहजो-गभीर, ले आये दृग्-नीर ।।जलं।। ‘आये बनने’,सहजो-निरंजन,लाये चन्दन ।।चन्दनं।। ‘आये बनने’,सहजो-निराकुल,लाये तण्डुल ।।अक्षतं।। ‘आये बनने’,सहजो-सुजन,ले आये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 688 -हाईकू- थाम ली, गुरु जी ने अंगुली, ‘मेरी’ किस्मत खुली ।।स्थापना।। दिन रैन, मैं भेंटूॅं तेरे चरणों में, नीर नैन ।।जलं।। याम आठ, मैं भेंटूॅं तेरे चरणों में, गंध […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 687 =हाईकू= सर गुरु ले लें सबके ग़म, न रब से कम ।।स्थापना।। वृत्ति-दोगली जाये गल, ले भाव ये भेंटूॅं जल ।।जलं।। विलाये वन-क्रन्दन, ले भाव ये भेंटूॅं चन्दन ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 686 “हाईकू” कृपा थारी, जो निर्दाम पाऊँ सारी वस्तु, नमोस्तु ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, ‘कि पग पखार, यूँ ही रोज पाऊँ ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ, ‘कि नवधा-भक्ति, यूँ ही रोज पाऊँ ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 685 *हाईकू* रूठे रहना तुम, लेंगे मना ‘जि गुरु जी हम ।।स्थापना।। होने गभीर, आपके चरणों में चढ़ाऊॅं, नीर ।।जलं।। स्वर्ण सुगंध ! आपके चरणों में चढ़ाऊॅं, गंध ।।चन्दनं।। हेतु […]
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