परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 714 =हाईकू=उठ न रहा था पलड़ा, ‘जी ‘गुरु’ सो नाम पड़ा ।।स्थापना।। ए ! सुमेर-वत् चारित अविचल, भेंटूँ दृग् जल ।।जलं।। ए ! पाँच पाप हिंसादि निकंदन, भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। ए […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 714 =हाईकू=उठ न रहा था पलड़ा, ‘जी ‘गुरु’ सो नाम पड़ा ।।स्थापना।। ए ! सुमेर-वत् चारित अविचल, भेंटूँ दृग् जल ।।जलं।। ए ! पाँच पाप हिंसादि निकंदन, भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। ए […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 713 -हाईकू-पाये रोशनी सितारे, आये हम भी तेरे द्वारे ।।स्थापना।। प्रतिभा…रत संस्कृति संरक्षक, भेंटूँ उदक ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन धार,कर्तृ गृह-गृह श्री-जी जीर्णोद्धार ।।चन्दनं।। कृपाल ! कलि-जुग-गोपाल !भेंटूँ थाल धाँ-शाल ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 712 =हाईकू=छवि माफिक भगवन्तकिसकी सिवाय सन्त ।।स्थापना।। भू-सदलगा उद्धारक,मैं भेंटूँ गंगा उदक ।।जलं।। पून शरद अवतार ! मैं भेंटूँ चन्दन धार ।।चन्दनं।। चर्चित कृति मूक-माटी कर्तार ! भेंटूँ धाँ न्यार […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 711 =हाईकू=डोर शबरी थामी,लो थाम और हमरी स्वामी ।।स्थापना।। दृग् धार छोड़ी, पा कृपा आप बाँस आलाप छेड़ी ।।जलं।। कुंकुम तुम धूली पाँवन,भेंटूँ सो गंध-बावन ।।चन्दनं।। तुमने छुआ ‘अन’ मिश्री […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 710 =हाईकू=करूँ आह्वान मैं कैसे तेरा,जिया छोटा सा मेरा ।।स्थापना।। भावी सिद्धों की श्रेणी में आने,लाये जल चढ़ाने ।।जलं।। जमीं आठवीं निजी बनाने, लाये गंध चढ़ाने ।।चन्दनं।। सिद्ध-शिला पे राज […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 709 =हाईकू= दुविधा मन, छूमंतर, छू पूजा गुरु-भगवन् ।।स्थापना।। तीजे दृग् भींजे पाने, हम लाये दृग्-जल चढ़ाने ।।जलं।। गति-गति का बंध मिटाने, लाये गंध चढ़ाने ।।चन्दनं।। दीवाली अब ‘कि मनाने, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 708 =हाईकू= पाये मेरा भी आँगन, कभी तेरा पड़गाहन ।।स्थापना।। दृग्-जल भेंटूँ, ‘कि भ्रमण जामन-मरण मेंटूँ ।।जलं।। चन्दन भेंटूँ, ‘कि जन्म जन्मातर आतप मेंटूँ ।।चन्दनं।। अक्षत भेंटूँ, ‘कि पद जेते […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 707 =हाईकू= दीपावली सा पावन, गुरु जी का आना आँगन ।।स्थापना।। बदली नव-जबां तकदीर, मैं भी लाया नीर ।।जलं।। सर्वोदय ने क्या न पाया, चन्दन ले मैं भी आया ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 706 =हाईकू=गुरु जी ‘जहाँ’ रक्खें पग, भूमि वो बने सुरग ।।स्थापना।। सादर,तेरे चरणों में चढ़ाऊँ, जल गागर ।।जलं।। सानंद,तेरे चरणों में चढ़ाऊँ, गागर गंध ।।चन्दनं।। अतुल,तेरे चरणों में चढ़ाऊँ, शालि […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 705 =हाईकू=करें गुरु जी जिसकी रक्षा, उसे डर किसका ।।स्थापना।। निर्मल, तेरे चरणों में भगवन्, भेंटूँ दृग्-जल ।।जलं।। सानन्द,तेरे चरणों में भगवन्,चढ़ाऊँ गंध ।।चन्दनं।। ले श्रद्धा,तेरे चरणों में भगवन्,भेंटूँ शालि-धाँ […]
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