परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 725 “हाईकू”गुरु,समान महावीर, मिटाने में लगे पीर ।।स्थापना।। आप ‘सिवा’ न, पाप विनाशक, सो भेंटूँ उदक ।।जलं।। आप ‘सिवा’ न पाप निकन्दन, सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। आप ‘सिवा’ न पाप […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 725 “हाईकू”गुरु,समान महावीर, मिटाने में लगे पीर ।।स्थापना।। आप ‘सिवा’ न, पाप विनाशक, सो भेंटूँ उदक ।।जलं।। आप ‘सिवा’ न पाप निकन्दन, सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। आप ‘सिवा’ न पाप […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 724 =हाईकू=चूके कहने से दुनिया कब, आ भी जाओ अब ।।स्थापना।। सपने सँजों मुक्ति के, घट जल लाया मुक्ति के ।।जलं।। सपने सँजों क्षेम केघड़े गंध लाया प्रेम के ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 722 =हाईकू=सभी के दिल में गुरु महाराज, करते राज ।।स्थापना।। चलते तुम ‘नौ-वधु’ से संभल, सो भेंटूँ जल ।।जलं।। भुलाया तुम ने वन-क्रन्दन,सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। चलातेतुम चालते सत्पथ,सो भेंटूँ अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 721 =हाईकू=जहाँ सभी की हो सुनवाई,‘द्वार’ वो गुरुराई ।।स्थापना।। श्री गुरु ज्ञान कृति-चेतन, भेंटूँ नीर-नयन ।।जलं।। श्री गुरु ‘ज्ञान’ पुत्र औरस, भेंटूँ चन्दन रस ।।चन्दनं।। प्राणों से प्यारे श्री गुरु […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 720 =हाईकू=मेरे भगवन् ! थोड़े और पास से, दे दो दर्शन ।।स्थापना।। न ठुकराना, ले जल आये गंगा का जाना माना ।।जलं।। ठग जमाना,आये, चन्दन लायेन ठुकराना ।।चन्दनं।। धाँ लाये, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 719 =हाईकू= गुरु हूबहू माँ, ले गोद में, जो, दें छुवा आसमाँ ।।स्थापना।। यूँ ही, रोज ही, पाने गंधादक, मैं भेंटूँ उदक ।।जलं।। यूँ ही, रोज ही पाने आप दर्शन, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 718 =हाईकू=खबर,रक्खा करते नजर, माँ सी गुरुवर ।।स्थापना।। अ’जि ‘जी’ चुरा पाये तेरा,तोहफा दृग्-जल मेरा ।।जलं।। तुझसे लागी लगन मोरी, भेंटूँ गंध कटोरी ।।चन्दनं।। तेरा नाम ले न थके जुबाँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 717 =हाईकू=श्री गुरु पास, रहती बात, कुछ हटके, खास ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए ! विगत माया-मिथ्या-निदान शल ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, गंग-जमुन-दृग् ! ‘कि सुना क्रन्दन ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत, अय ! संरक्षक […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 716 “हाईकू”गुरु शगुन हैं, दीवाली का दिन है, फागुन हैं ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् नीर, लघु नन्दन वीर !अय ! गभीर ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, भंजन भौ-क्रन्दन !ए ! निरंजन ।।चन्दनं।। भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 715 =हाईकू=गुरु उतने खासमखास, लेनी जितनी श्वास ।।स्थापना।। भेंटूँ निर्मल नीर, दृग्-नीर, धीर-वीर-गंभीर ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन धार, निर्जन वन क्रन्दनहार ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत धान, करुणा-दया-क्षमा निधान ।।अक्षतं।। भेंटूँ सुमन थाल,कलि गोपाल […]
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