परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 745 हाईकूले लो शरण में,मुझे जगह दे दो चरण में ।।स्थापना।। रहा उलझ, अपना लो, जल,‘कि जाऊँ सुलझ ।।जलं।। पनीले नैन, अपना लो, चन्दन, ‘कि पाऊँ चैन ।।चन्दनं।। बजे द्वादश, […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 745 हाईकूले लो शरण में,मुझे जगह दे दो चरण में ।।स्थापना।। रहा उलझ, अपना लो, जल,‘कि जाऊँ सुलझ ।।जलं।। पनीले नैन, अपना लो, चन्दन, ‘कि पाऊँ चैन ।।चन्दनं।। बजे द्वादश, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 744 हाईकूराहे-मिलन-प्रभु, गुजरे छूती चरण गुरु ।।स्थापना।। ‘सुनते तुम’ फेरते तकदीर, सो भेंटूँ नीर ।।जलं।। ‘सुनते तुम’ मेंटते पाप-बंधसो भेंटूँ गंध ।।चन्दनं।। ‘सुनते तुम’ एक रहनुमाँ, सो भेंटूँ शालि धाँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 743 हाईकूप्रभु, न सुख ही, दें दुख भी, पै, दें गुरु सुख ही ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, लो सँभाल, कहीं मैं गिर न जाऊँ ।।जलं।। लो सँभाल, ले फाँस वन क्रन्दन, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 742 हाईकूशीश झुकाते ही गुरु को, ‘कि रीझ जाते प्रभु लो ।।स्थापना।। सब ही तो लुटा दिया,जग को जग का,‘जि गुरु जी ने, क्या न लौटा दियाऔर तो और,अभी भी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 741 हाईकूमाँ हैं, आत्मा हैं‘गुरुजी’ महात्मा हैं, परमात्मा हैं ।।स्थापना।। पाने तुम सा सम-दरश, भेंटूँ जल कलश ।।जलं।। भेंटूँ मलय-रस, पाने तुम-सा सम-दरश ।।चन्दनं।। भेंटूँ अछत-कण, पाने तुम-सा सम्यक् दर्शन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 740 पतझड़ मैं, क्या न करना मुझे सावन गुरु जीपामर मैं, क्या न करना मुझे पावन गुरु जीक्या मुझे, रखना है बना पाहन ही, दे भी दो, अपनी इस अहिल्या […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 738 हाईकूदेते हैं चाँद तारे छुवा,‘गुरु जी’ पिटारे दुआ ।।स्थापना।। धनी निर्धन तुम्हें एक से, भेंटूँ जल कलशे ।।जलं।। तुम्हें निर्धन एक ‘गिर-धन, सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। पैसे वाले-से, भाग […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 738 हाईकूदेते हैं चाँद तारे छुवा,‘गुरु जी’ पिटारे दुआ ।।स्थापना।। धनी निर्धन तुम्हें एक से, भेंटूँ जल कलशे ।।जलं।। तुम्हें निर्धन एक ‘गिर-धन, सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। पैसे वाले-से, भाग […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 737 हाईकूभाग जगाते, गुरु खिवैय्या, नैय्या, पार लगाते ।।स्थापना।। तुम भू-द्यु में न खींचो लकीर, सो भेंटूँ नीर ।।जलं।। जैसा भवन, तुम्हें वैसा वन, सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। भेंटूँ शालि-धाँ, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 736 हाईकूजिसने आप को लिया पड़गा, वो बड़ भागवाँ ।।स्थापना।। कर-पाने दृग्-नम, लाये चढ़ाने उदक हम ।।जलं।। बसाने मन शम, लाये चढ़ाने चन्दन हम ।।चन्दनं।। पाने आत्मा में रम, लाये […]
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