परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 755 =हाईकू=मेंटी चन्दन पीरा, ए ! मेरे वीरा, हूँ मैं भी तेरा ।।स्थापना।। प्रणाम मेरे, कर स्वीकार लो, ये पानीय घड़े ।।जलं।। वन्दन मेरे,‘स्वीकार लो’ये घडे़, चन्दन मेरे ।।चन्दनं।। ढोक […]

परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 755 =हाईकू=मेंटी चन्दन पीरा, ए ! मेरे वीरा, हूँ मैं भी तेरा ।।स्थापना।। प्रणाम मेरे, कर स्वीकार लो, ये पानीय घड़े ।।जलं।। वन्दन मेरे,‘स्वीकार लो’ये घडे़, चन्दन मेरे ।।चन्दनं।। ढोक […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 754 -हाईकू-चाहिये सहारे, न गैरों के मुझको ।निशाँ मिल गये, तेरे पैरों के मुझको ।।आँधिंयाँ चलें, आये तूफाँ हहा ! रे !पार उस खड़े, तुम जो बाहें पसारे ।।डूबने न […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 753 =हाईकू=हो कब घी का पानी डूबना, वैसे ‘गुरु’ कम न ।।स्थापना।। मेरी भी सुन लो, मेरी भी धारा दृग्-पानी चुन लो ।।जलं।। मेरी भी सुन लो, मेरी भी चन्दन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 752 =हाईकू= भरा गुरु ‘जी’ न अभी, जीमने आ जाना कल भी ।।स्थापना।। तुझे खुद से बढ़के पर-पीर, सो भेंटूँ नीर ।।जलं।। मेंटे तू सुन के और क्रन्दन, सो भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 751 =हाईकू=कभी, हो यूँ भी, आप विधी लें,और याद आऊँ मैं ।।स्थापना।। पा पुण्य-पीछी सा जाऊँ, ले भाव ये जल चढ़ाऊँ ।।जलं।। ‘पीछी-पुण्य’ ले आश, भेंटूँ चन्दन और सुवास ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 750 हाईकूरवि, कवि को राज जो, खोलें गुरु महाराज वो ।।स्थापना।। आश पुरानी पीछी तोर, ‘ले आये’ नम दृग् कोर ।।जलं।। पुरानी पीछी से जोड़ने बंधन, भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। पुरानी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 749 हाईकू तरु छाँवों में आते, गुरु किसी को न ठुकराते ।।स्थापना।। देना सँभाल ‘कि अखीर, रोज ‘सो ले आता’ नीर।।जलं।। जोड़ने आप-से संबंध, रोज ‘सो ले आता’ गंध ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 748 हाईकूलग काँधे माँ चाहिये दूजी,बच्चों को वो गुरु जी ।।स्थापना।। तूने बदल दी तकदीर, भेंटूँ मैं सिर्फ नीर ।।जलं।। मुझ पे तेरी दया अनन्त, भेंटूँ मैं सो गंध ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 747 हाईकूसुमरते ही बिगड़ी बनी,गुरु जी चिन्तामणी ।।स्थापना।। लाये चढ़ाने, जल नयन,पाने सम्यक् रतन ।।जलं।। लाये चढ़ाने, घट चन्दन,पाने स्वात्म चिंतन ।।चन्दनं।। लाये चढ़ाने, अक्षत कण, पाने सम्यक्त्व धन ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 746 हाईकू पलक भी, की आपसे बात, बड़ी सौगात ।।स्थापना।। बचाने, यूँ ही खो रहे पल, लाया चढ़ाने जल ।।जलं।। बचाने, खोते यूँ ही क्षण, चढ़ाने लाया चन्दन ।।चन्दनं।। क्षण […]
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