==आरती== आरतिया आरतियाविद्यागुरु की आरतिया, उतारें आओ ।विद्यागुरु की मूरतिया, निहारें आओ ।। चीर चीर ये निकले घर से ।पीर पराई लख दृग् बरसे ।।सूरज, चांद न तारे इनसे ।लख गुणियों को परणति हरसे ।।ज्योति जगाओ ।विद्यागुरु की आरतिया, उतारें […]

==आरती== आरतिया आरतियाविद्यागुरु की आरतिया, उतारें आओ ।विद्यागुरु की मूरतिया, निहारें आओ ।। चीर चीर ये निकले घर से ।पीर पराई लख दृग् बरसे ।।सूरज, चांद न तारे इनसे ।लख गुणियों को परणति हरसे ।।ज्योति जगाओ ।विद्यागुरु की आरतिया, उतारें […]
==आरती== दीपों की थाल सजाओ ।विद्यागुरु की आ-रति उतारें आओ ।।विद्यागुरु सतजुग निर्ग्रन्था ।विद्यागुरु कलजुग अरिहन्ता ।।भावी इक शिव राधा कन्ता ।विद्यागुरु चल आगम ग्रन्था ।।उर लौं गुरु नाम जगाओ ।दीपों की थाल सजाओ ।विद्यागुरु की आ-रति उतारें आओ ।।१।। […]
==आरती== आ-रति कीजे संध्या संध्या ।सुत श्रीमति मल्लप्पा नन्दा ।। शरद पूर्णिमा का दिन आया ।ग्राम सदलगा उत्सव छाया ।।लिये दीप घृत गाय सुगन्धा ।आ-रति कीजे संध्या संध्या ।।१।। सूर देश-भूषण ब्रमचारी ।साक्षि ज्ञान-गुरु दीक्षा थारी ।।छोड़ और सब गोरख […]
==आरती== कीजे आ-रति, सुबहो-शाम ।ज्योत जगा उर श्री गुरु नाम ।। पूरण मल्-लप्पा मनकाम ।श्रीमति हाथ सुकृत परिणाम ।।चांद शरद गोदी अभिराम ।ज्योत जगा उर श्री गुरु नाम ।कीजे आ-रति, सुबहो-शाम ।।१।। लुभा न पाये भोग तमाम ।पुष्प-बाण करने नाकाम,गुरु […]
==आरती== छवि भगवन्त बलिहारी ।गुरु निर्ग्रन्थ अविकारी ।। आओ दीप लेके हाथ ।आ-रति करें मिलके साथ ।।करुणा दया अवतारी ।गुरु निर्ग्रन्थ अविकारी ।।१।। अपने पांव नापें गांव ।तरु से धूप खा, दें छांव ।।नदिया से परुपकारी ।गुरु निर्ग्रन्थ अविकारी ।।२।। […]
==आरती== आ-रती आओ उतारें ।पादुका गुरु शीष धारें ।। गुरु सुरग, गुरु चार तीरथ ।मोक्ष गुरु, गुरु शुभ-मुहूरत ।।फिर न भव मानव संवारे ।आ-रती आओ उतारें ।पादुका गुरु शीष धारें ।।१।। गुरु हि ब्रह्मा, गुरु हि विष्णू ।रुद्र गुरु, गुरु […]
==आरती== आरती छोटे बाबा कीमिटाती पीर सुनो साथी ।भिंटाती तीर, चुनो साथी ।।छोड़ के और काम बाकी ।आरती छोटे बाबा की अश्रु जल भर के आंखों में ।दीप घृत लेके हाथों में ।करो संध्या तीनों साथी ।छोड़ के और काम […]
==आरती== ।। गुरु धरती के देव कहाते ।। सांझ सांस मिल आ-रति कीजे ।सहजो पूर्ण मनोरथ कीजे ।।वेद, पुराण, शास्त्र बतलाते ।गुरु धरती के देव कहाते ।।१।। श्रद्धा सुमन समर्पित कीजे ।इह-भव जश, पर-भव सुख लीजे ।।विघन, उपद्रव, कष्ट मिटाते […]
श्रुत देव लघु चालीसा‘दोहा’ मेरा अपना तुम सिवा,यहाँ न कोई और Iजब-जब दूँ, आवाज मैं, आ जाना माँ दौड़ ।। माँ बच्चों को चुनती ।माँ बच्चों की सुनती ।। माँ दिल रखे अनोखा । दिल रखती बच्चों का ।।१।। बच्चे […]
श्री शान्ति, कुन्थ, अर लघु चालीसा ‘दोहा’ आ सत्संगत से जुड़ें,कलि इस भाँत न और ।थकना, थमना अन्त में,तजें न क्यों मृग दौड़ ।। कहा यूँ ही ना दीन-दयाल ।तुम्हें रहता भक्तों का ख्याल ।।दूसरे काम और सब छोड़ ।बुलाते […]
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