परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 109 पड़ गई नजर क्या तुम्हारी । खुल गई लॉटरी हमारी ।। तर गई कुटिया गरीबा । जाऊँ मैं आज बलिहारी ।।स्थापना।। भर नीर, तीर हित आये । आ […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 109 पड़ गई नजर क्या तुम्हारी । खुल गई लॉटरी हमारी ।। तर गई कुटिया गरीबा । जाऊँ मैं आज बलिहारी ।।स्थापना।। भर नीर, तीर हित आये । आ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 108 निराकुल निरभिमानी । निराकुल ‘जिन-कि’ वाणी ।। गुरु वे बाबा-छोटे । लें भाव विहर खोटे ।। स्थापना ।। लाये जल भरे घड़े । रहते नित भाव बड़े ।। गुरु-वर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 107 निरे निराकुल यही । खोज लिया हर कहीं ।। यही सभी ने कही । सिर्फ इन्हीं से यही।।स्थापना।। कहाँ धीर साथ में । लिये नीर हाथ मैं ।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 106 बनने चले निराकुल । रहना सीखे मिलजुल ।। गुरु वे विद्या-सागर । अपना लें, करुणा कर ।।स्थापना।। भर झारी जल लाये । मन चंचल पन भाये ।। गुरुवर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 105 क्षमा न जिनसी पास धरा । जिन्हें कुटुम सी वसुन्धरा ।। श्री गुरु वे विद्यासागर । दें सद्या कर शिव नागर ।।स्थापना।। कलशे भर लाये जल के । […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 104 इक यही निराकुल हैं । गुरु ज्ञान बाग गुल हैं ।। ओ ! गुरु विद्या सागर । अपना लो करुणा कर ।।स्थापना।। संशोधन कर जल का । फिर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 103 तेरी सम रस सानी । जैसी शीतल वाणी ।। ना त्रिभुवन दीख पड़े । सो जोड़े हाथ खड़े ।।स्थापना।। ओ ! श्रमण संघ राया । आया, जल भर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 102 थिर साध रहे संधान । हित संस्कार वरदान ।। ओंकार दूसरे नाम । गुरु विद्या सिन्धु प्रणाम ।।स्थापना।। लाये भर प्रासुक नीर । हो सुमरण वक्त अखीर ।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक – 101 गुरु विद्या सिन्धु निराले हैं । गुरु ज्ञान सिन्धु दृग् तारे हैं ।। हर लेते सुना पीर सबकी । हमने भी आज पुकारे हैं ।।स्थापना।। मीरा को सुनते […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक 100 पर हित एक साधना,जिनका काम है ।छुपा भले नामों में, जिनका नाम है ॥रहे दूसरी कक्षा के,पढ़ने वाले ।श्री गुरु विद्या सागर तिन्हें ,प्रणाम है ।।स्थापना।। पता न दूर […]
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