परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 329 गोरी हो या काली हो ।तुम्हें प्राण से प्यारी गो ।।खेवैय्या गैय्या-नैय्या |हैं चाहें हम सब छैय्या ।।स्थापना।। गायें भी सँग आईं हैं।कलशें जल सँग लाई हैं ।।खेवैय्या गैय्या-नैय्या,हैं चाहें […]
