परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 369 हाईकू जो गुरु जी के पीछे लागे, भाग उनके जागे ।।स्थापना।। भेंट दृग्-जललो देख जरा, एक बार मुस्कुरा ।।जलं।। लो स्वीकार, ये चन्दन घुरा, एक बार मुस्कुरा ।।चन्दनं।। लो […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 369 हाईकू जो गुरु जी के पीछे लागे, भाग उनके जागे ।।स्थापना।। भेंट दृग्-जललो देख जरा, एक बार मुस्कुरा ।।जलं।। लो स्वीकार, ये चन्दन घुरा, एक बार मुस्कुरा ।।चन्दनं।। लो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 368 *हाईकू* पाप मन के खो जाते,श्री भगवन् के जो हो जाते ।।स्थापना।। ले आये नीर नयन,खोजे, न पाये जल कण ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन,‘जि गुरु जी आप सा ही’ पाने मन […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 367 **हाईकू** गुरु द्वार आ, देते ही ढोक, होते छू रोग-शोक ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ,मैं भीतर जाऊँ,मैं भी `तर´ जाऊँ ।।जलं।। चन्दन लाऊँ,चरण चढ़ाऊँ, मैं भी `तर´ जाऊँ ।।चन्दनं।। अक्षत लाऊँ,विनत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रमांक 366 =हाईकू= पास किसी के,नजर-पारखी तो बस ऋषि के ।।स्थापना।। कल फिर से, पाऊँ कि गन्धोदक,भेंटूँ उदक ।।जलं।। कल फिर से, पाने रज-चरण,भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। कल फिर से, पाने तेरी मुस्कान,भेदूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 365 ==हाईकू== ‘जि मिलने से पहले श्री गुरु,न जिन्दगी शुरु ।।स्थापना।। जल अँखिंयाँ,स्वीकारो तोहफा ये भेंट किया ।।जलं।। चन्दन ‘जि…आ, स्वीकारो तोहफा ये भेंट किया ।।चन्दनं।। धाँ -शाली नया,स्वीकारो तोहफा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 364 हाईकू थामी क्या गुरु जी ने छिगरी,बनी माटी गगरी ।।स्थापना।। भेंटूँ जल ये गुरुराई,संस्पर्शूं ‘कि गहराई ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन गुरुराई,संस्पर्शूं ‘द्यु’ ठुकराई ।।चन्दनं।। भेंटूँ ‘शाली- धाँ’ गुरुराई, संस्पर्शूं ध्याँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 363 हाईकू ले तकलीफ लेते,‘जि गुरु जी दे रिलीफ देते ।।स्थापना।। छूना गगना, जल ये अपना,दो पूर सपना ।।जलं।। सूना अँगना, गंध ये अपना, दो पूर सपना ।।चन्दनं।। सुधा चखना, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 362 =हाईकू=है ही क्या म्हारा, मैं लौटा रहा, दिया तुम्हें, तुम्हारा ।।स्थापना।। ‘मैं ले’ हाथों में, कम्-कण,लगा रहा हूँ जयकारा,है ही क्या म्हारा,मैं लौटा रहा, दिया तुम्हें, तुम्हारा ।।जलं।। ‘मैं लै’ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 361 =हाईकू=उनका दास हूँ,झिरें और हित जिनके आँसू ।।स्थापना।। स-मँझधारलिये जल,बना लो समझदार ।।जलं।। मैं माटी-माधो,लिये चन्दन,बना लो पाठी साधो ।।चन्दनं।। मैं सीधा सादा,लिये अक्षत,बना लो वीणा साधा ।।अक्षतं।। ‘मैं भोला […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 360 =हाईकू=आशु जिनके आँसु आ जाते,गुरु उनमें आते ।।स्थापना।। रख लो भक्तों की श्रृंखला में,जल ये, ‘दो गला मैं’ ।।जलं।। रख लो हंसों की श्रृंखला में,गंध ये, ‘दो गला मैं’ ।।चन्दनं।। […]
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