परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 399 हाईकू तुम्हें करने समर्पित,चाँद ले आता अमृत ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग् जल,कुछ करो ‘कि बाबा ! मेंटूँ गहल ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन,कुछ करो ‘कि बाबा ! मेंटूँ बन्धन ।।चन्दनं।। भेंटूँ धाँ थाल,कुछ […]
