परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 409 =हाईक=आ मिरे द्वार भी,ले लीजे गुरु जी आहार कभी ।।स्थापना।। अपना,मीरा लो बना मुझे, भेंटूँ दृग् जल तुझे ।।जलं।। अपना, चेरा लो बना मुझे,भेंटूँ चन्दन तुझे ।।चन्दनं।। अपना, कुछ […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 409 =हाईक=आ मिरे द्वार भी,ले लीजे गुरु जी आहार कभी ।।स्थापना।। अपना,मीरा लो बना मुझे, भेंटूँ दृग् जल तुझे ।।जलं।। अपना, चेरा लो बना मुझे,भेंटूँ चन्दन तुझे ।।चन्दनं।। अपना, कुछ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 408 “हाईकू”आया, लो रँग मीरा रंग,रख लो अपने संग ।।स्थापना।। दृग् मोति-लर,लो स्वीकार कर, ये जल गागर ।।जलं।। दृग् गंग धार,लो स्वीकार, चन्दन से मनहार ।।चन्दनं।। नम नयन,आया, लाया धाँ शालि […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 407 =हाईकू=देखूँ पलक न तुझे,आयें आँसु झलक मुझे ।।स्थापना।। दे कमंडल अपना दो,दृग्-जल ये अपना लो ।।जलं।। बना नंदन अपना लो,चन्दन ये अपना लो ।।चन्दनं।। दे पल ध्यान अपना दो,सुधान ये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 406 =हाईकू=तोरा,हिवरा मोरा,‘दीवाना’चाँद का ज्यों चकोरा ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ,‘के झिल-मिला आपसे गुण पाऊँ ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ,‘के आपसी चारित सुगंध पाऊँ ।।चन्दनं।। सुधाँ चढ़ाऊँ,‘के रत्नत्रय आप से जुदा पाऊँ ।।अक्षतं।। पुष्प चढ़ाऊँ,‘के […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 405 हाईकू चाँद…चाँद-सा…न चाहूँ मैं,सिर्फ मैं तो, चाहूँ तुम्हें ।।स्थापना।। व्यथा सुनाने आया तुम्हें,दृग् बिन्दु लिये आँख में ।।जलं।। चलो, मनाने आया तुम्हें,चन्दन लिये हाथ में ।।चन्दनं।। रोज स्वप्न में पाने […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 404 हाईकू जीवन नया पा गया, पा तुम्हें, क्या न मैं, पा गया ।।स्थापना।। जल ये भेंट रहा, जा रहे, चालो ले हमें वहाँ ।।जलं।। चन्दन भेंट रहा, आगे तुम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 403 हाईकू गले आफत पड़ी,कर कृपा, दो बना बिगड़ी ।।स्थापना।। जल समेत मैं झुका रहा शीशहेत आशीष ।।जलं।। झुकाऊँ शीश,मैं चन्दन समेत, हेत आशीष ।।चन्दनं।। लाया धाँ बीन-बीन, फेर छत्तीस,हेत आशीष […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 402 =हाईकू= जुबां जो नाम ले सुबह-सुबह,है तेरा वह ।।स्थापना।। कानी-फूसी ‘कि जाये खो,भेंटूँ जल-झारी आपको ।।जलं।। टोका-टाकी ‘कि जाये खो,भेंटूँ गन्ध न्यारी आपको ।।चन्दनं।। बेशर्मी-गर्मी ‘कि जाये खो,भेंटूँ धाँ-शालि आपको […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 401 हाईकू धूल ही मैं, क्या रही भूल,‘चन्दन’ कर दी धूल ।।स्थापना।। अनबन दो विघटा, जल भरा लिये कलशा ।।जलं।। फनाफन दो विहँसा, घिस लाया चन्दन निरा ।।चन्दनं।। दर्पण दो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 400 =हाईकू= उन्हें दे ‘दिया’ सुखी कर,दुःखी मैं भी गुरुवर ।।स्थापना।। कहे अल्बिदा तू-तू मैं-मैं,‘कि जल भिटाऊँ तुम्हें ।।जलं।। अपना बना लो हमें,‘कि चन्दन भिटाऊँ तुम्हें ।।चन्दनं।। सुनो, अपना लो हमें,‘कि […]
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