परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 419 =हाईकू=करें छिन में, छिन्न-भिन्न विघन,गुरु भगवन् ।।स्थापना।। ‘सुनते तुम’न अलसाये पल, सो भेंटूँ जल ।।जलं।। ‘सुनते तुम’काँटते बन्धन,सो भेंटूँ चन्दन ।।चन्दनं।। ‘सुनते तुम’वर्तमाँ सन्मतसो भेंटूँ अक्षत ।।अक्षतं।। ‘सुनते तुम’अंक […]
