परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 429 हाईकू कोई भी लेता मना, आपको आता ही न रूठना ।।स्थापना।। भेंटूँ ये जल, ओ ! गरीब नवाज, राखियो लाज ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, ओ ! गरीब नवाज, साधियो काज […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 429 हाईकू कोई भी लेता मना, आपको आता ही न रूठना ।।स्थापना।। भेंटूँ ये जल, ओ ! गरीब नवाज, राखियो लाज ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, ओ ! गरीब नवाज, साधियो काज […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 428 हाईकू लाज राखना थोड़ी,तेरे लिये ही दुनिया छोड़ी ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए दयालु ! ए कृपालु !ले अपना तू ।।जलं।। भेंटूँ खुश्बू , ए दयालु ! ए कृपालु !दो भेंट […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 427 हाईकू न तुम भले हमें,‘चाहते’ हम अकेले तुम्हें ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए ! गुरु परम,मेंटो जरा जनम ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, ए ! गुरु परम,दृग् दो भेंट नम ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 426 हाईकू साँच कहते,‘दिल में मेरे सिर्फ’ आप रहते ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए ! और भान,दो मेरा कर कल्याण ।।जलं।। भेंटूँ गंध, ए ! मोड़ थानदो मेरा कर कल्याण ।।चन्दनं।। भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 425 हाईकू करते गुरु महाराज, दिल न किसके राज ।।स्थापना।। भेंटूँ जल ए ! शुभ शगुन,माल-भक्ति लूँ बुन ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, ए ! शुभ शगुन, ले राह औगुन ।।चन्दनं।। भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 424 हाईकूआपने जो आ, रुखा सूखा स्वीकार लियाशुक्रिया ।।स्थापना।। रखना यूँ ही, छत्र-छाँव बनाये,‘कि जल लाये ।।जलं।। रखना यूँ ही, ‘कि अदना बनाये,चन्दन लाये ।।चन्दनं।। रखना यूँ ही, ‘कि आशीष बनाये,अक्षत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 423 =हाईकू=आप रखने जो लगे ख्याल, हुये हम निहाल ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ओ वर्तमाँ-महावीर,लो लगा तीर ।।जलं।। भेंटूँ गन्ध, ओ वर्तमाँ-महावीर,दो मेंट पीर ।।चन्दनं।। भेंटूँ सुधॉं, ओ वर्तमाँ-महावीर,दो थमा धीर ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 422 =हाईकू= सिवाय थारे, रहा न अब कुछ भी, पास म्हारे ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए ! एक सहारे, कष्ट मेंटो हमारे ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन ए ! पुण्य-द्वारे, पाप मेंटो हमारे […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 421 =हाईकू=सभी कुछ दे दिया तुम्हें,पहली ही नजर में ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ए ! सर अध्यात्म हंसा,संपूरो मंशा ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, ए ! मसीहा अहिंसा,संपूरो मंशा ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत, ए ! […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 420 “हाईकू”सिर्फेक सन्त,अविरोध सभी को आते पसन्द ।।स्थापना।। बाला चन्दन, भाव-भर मैं,भेंटूँ दृग् जल तुम्हें ।।जलं।। ग्वाला कोण्डेश, भाव-भर मैं,भेंटूँ चन्दन तुम्हें ।।चन्दनं।। अधिप शत, भाव-भर मैं,भेंटूँ अक्षत तुम्हें ।।अक्षतं।। अंकवाँ […]
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