परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 439 =हाईकू= दृग् म्हारी अभी भी नम,चाँद दूज ! पाया पूनम ।।स्थापना।। छू ये दृग्-जल,ओ ! वसु माँ सुत,दो बना अद्भुत ।।जलं।। छू ये संदल,ओ ! श्रुत विश्रुत,दो बना प्रनुत ।।चन्दनं।। […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 439 =हाईकू= दृग् म्हारी अभी भी नम,चाँद दूज ! पाया पूनम ।।स्थापना।। छू ये दृग्-जल,ओ ! वसु माँ सुत,दो बना अद्भुत ।।जलं।। छू ये संदल,ओ ! श्रुत विश्रुत,दो बना प्रनुत ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 438 हाईकू मुख में दाना, ‘ला-ला’कोकिल काकी आहा खिलाना ।।स्थापना।। कर स्वीकार जल,नेक-दिल ! दो दिला मंजिल ।।जलं।। कर स्वीकार चन्दन,आ-क्रन्दन दो मेंट वन ।।चन्दनं।। कर स्वीकार तण्डुल,निराकुल दो भिंटा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 437 हाईकू माँ बन,गुरु देते सुलझा,बच्चों की उलझन ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, ओ चरित हिमाल !दो का निहाल ।।जलं।। भेंटूँ संदल, ओ दीन दयाल !दो कर निहाल ।।चन्दनं।। भेंटूँ तण्डुल, ओ मति […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 436 =हाईकू=टूटा रिश्ता भी रखे संभाल, गुरु तन्तु-मृणाल ।।स्थापना।। भेंटूँ जल, दो बना हिया दरिया,जिया वसिया ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन, दो बना मुरलिया,जिया वसिया ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत, दो बना गगरिया,जिया वसिया ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 434 हाईकू छोटा हो, कोई या बड़ा,‘गुरु-द्वार’ सभी को खुला ।।स्थापना।। ले लो अपने अपनों में,दृग्-जल ये, और हमें ।।जलं।। ले लो अपनी शरण में,चन्दन ये, और हमें ।।चन्दनं।। ले […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 435 हाईकू है इक-पल न चैन मुझे, देखे वगैर तुझे ।।स्थापना।। भेंटूँ दृग्-जल, ए ! भक्त वत्सल,दृग्-भेंटो सजल ।।जलं।। भेंटूँ संदल, ए ! भक्त वत्सल,दो बना सरल ।।चन्दनं।। भेंटूँ तण्डुल, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 433 =हाईकू= पाये ‘कि गुरु-पग-पखारआई ‘द्यु’ गंग-धार ।।स्थापना।। हैं लाये भेंट जल,बनने जल भिन्न कमल ।।जलं।। हैं लाये भेंट संदल,पाने आपके कुछ पल ।।चन्दनं।। हैं लाये भेंट तण्डुल,पाने आप का गुरुकुल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 432 हाईकू आये सूरज किरण, छूने आप रज-चरण ।।स्थापना।। बोझा ‘सर’ दो उतार, ले जल ये, हैं आये द्वार ।।जलं।। नैय्या लगा दो किनार, चन्दन ले, हैं आये द्वार ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 431 हाईकू हुई जा रही दुनिया, गुरुजी की, चर्या जो नीकी ।।स्थापना।। मंजूर कर जल मेरा, दो दूर कर बखेड़ा ।।जलं।। मंजूर कर गंध-धारा, दो दूर कर भौ-कारा ।।चन्दनं।। मंजूर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 430 =हाईकू= रब-से, ‘गुरु’ सरस्वती पुत्रों में आगे सबसे ।।स्थापना।। पीड़ा समझ ली,तभी तुम्हें, भेंट की, ये जल की ।।जलं।। तपन मिटी, तभी तुम्हें, भेंट की, ये चन्दन की ।।चन्दनं।। […]
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