परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 459 “हाईकू” पास श्री गुरु के-बल, ‘लेख विधि’ फेर-बदल ।।स्थापना।। झोली भर दो खाली, लिये दृग् जल आये सवाली ।।जलं।। ‘के मना सकूँ दिवाली, लाये गंध मलय वाली ।।चन्दनं।। पाऊँ […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 459 “हाईकू” पास श्री गुरु के-बल, ‘लेख विधि’ फेर-बदल ।।स्थापना।। झोली भर दो खाली, लिये दृग् जल आये सवाली ।।जलं।। ‘के मना सकूँ दिवाली, लाये गंध मलय वाली ।।चन्दनं।। पाऊँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 458 =हाईकू=बारेक केलि,‘फलद’बार-नेक गुरु अकेली ।।स्थापना।। दृग् जल लाये पाँवन, गन्धोदक पाने आँगन ।।जलं।। चन्दन लाये पाँवन,आप जैसा करने मन ।।चन्दनं।। अक्षत लाये पाँवन, ‘कि तुम सा मने सावन ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 457 =हाईकू=होना तेरा ‘दे बता’क्या होगा, पूरा सपना मेरा ।।स्थापना।। भेंटूँ जल ए ! तुंग गिरवर,दो भेंट सबर ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन ए ! पाणि-पातर,दो भेंट सबर ।।चन्दनं।। भेंटूँ अक्षत ए ! […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 456 =हाईकू=न सूना जाये बरष,कृपा तेरी जाये बरस ।।स्थापना।। ‘के हाथी आदि, गहल बिलायें,दृगू जल चढ़ायें ।।जलं।। पाप बंधन नश जायें,सुगन्ध रस चढ़ायें ।।चन्दनं।। कालीं शक्तियाँ, बेतालीं बिलायें,धाँ शाली चढ़ायें ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 455 =हाईकू=बना बिगड़ी,आपने की मुझपे करुणा बड़ी ।।स्थापना।। पाद-मूल में, रख लो हमें,आया ले दृग् जल मैं ।।जलं।। चरणन में, रख लो हमें,आया ले चन्दन मैं ।।चन्दनं।। गुरु-कुल में, रख लो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 454 =हाईकू=दिखे दरख्ती सोच वाले,‘कि देते खो, सख्ती-ताले ।।स्थापना।। आत्मबल के रंग दो रंग,लाये दृग् जल संग ।।जलं।। सु-मरण के रंग दो रंग,लाये चन्दन संग ।।चन्दनं।। समकित के रंग दो […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 453 =हाईकू= रखते गुरु जी ! खबर सब की, दूजे रब ही ।।स्थापना।। स्वीकार जल, ओ सन्त-शिर- मौर, दो थमा दौड़ ।।जलं।। स्वीकार गंध, ओ ! निर्ग्रन्थ बेजोड़, दो दिला […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 452 -हाईकू – भिजाये बिना, ‘भक्त आसमां’ गुरु को चैन कहाँ ।।स्थापना।। जल अपना लो, अपने सा बना लो गुण क्रेता ।।जलं।। गंध अपना लो, अपने सा बना लो ऊर्ध्व […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 451 -हाईकू- शुक्रिया, इस शबरी का, है रख जो मान लिया ।।स्थापना।। स्वीकार जल ओ ! माहन्त महात्मा, दो ‘नन्त-रमा’ ।।जलं।। स्वीकार गंध, ओ ! भावी परमात्मा हो ‘ही’ खातमा […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 450 *हाईकू*कर स्वीकार,‘सेव-सेवक-खेव’दो लगा पार ।।स्थापना।। अपना जल,मेरा पूरा सपना किया, शुक्रिया ।।जलं।। घिसा चन्दन,मेरा ये जो अपना लिया, शुक्रिया ।।चन्दनं।। कहाँ शाली, धाँ खाली,थाली अपना लिया, शुक्रिया ।।अक्षतं।। भूल-नन्दन […]
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