परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 488 =हाईकू=विशुद्धि जाती बढ़ती ही बढ़ती,‘पाय’ अतिथी ।।स्थापना।। दृग् जल लाया, सुना, आपको दुःख मेंटना आया ।।जलं।। चन्दन लाया, सुना, आपको खुश्बू भेंटना आया ।।चन्दनं।। अक्षत लाया, सुना, आपको भक्त […]
