परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 499 =हाईकू=जहां-दोई, न मेरा कोई, ए ! बाबा,‘तेरे अलावा’।।स्थापना।। जल जमुन-गंग,दो पचरंगी चूनर रंग ।।जलं।। दो पचरंगी चुनर रंग,गंध गुंजित भृंग ।।चन्दनं।। दो पचरंगी चूनर रंग,लाये थान अभंग ।।अक्षतं।। दो […]
