परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 519 =हाईकू = पड़ें ‘जिस पे’ तेरी नजरें, उसे निहाल करें ।।स्थापना।। ‘के जल चढ़ा रहा, भै जन्म और न जाये सहा ।।जलं।। ‘के गंध चढ़ा रहा, भौ ताप और […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 519 =हाईकू = पड़ें ‘जिस पे’ तेरी नजरें, उसे निहाल करें ।।स्थापना।। ‘के जल चढ़ा रहा, भै जन्म और न जाये सहा ।।जलं।। ‘के गंध चढ़ा रहा, भौ ताप और […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 518 =हाईकू= थी ही जै गुरु जी बोली, ‘चार चाँद’ ‘कि पाई झोली ।।स्थापना।। ले खड़े, जल घड़े, जन्म ‘मृत्यु’ ‘कि राह पकड़े ।।जलं।। लिये चन्दन खड़े, त्राहि माम् भवा-ताप […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 517 =हाईकू = ढाई आखर ओ, हम पे नजर रखने लगो ।।स्थापना।। लाये जल, ‘कि हों मनसूबे जन्म-मृत्यु विफल ।।जलं।। लाये चन्दन, ‘कि हों मनसूबे भौ-वन विफल ।।चन्दनं।। लाये धान, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 516 *हाईकू* ‘दिये’ उत्तर, नुत्तर तेरे, मेरे प्रश्न अंधेरे ।।स्थापना।। जन्म मरण पीछे पड़े, त्राहि माम् ले जल खड़े ।।जलं।। परावर्तन पीछे पड़े, त्राहि माम् ले गंध खड़े ।।चन्दनं।। दुरित […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 515 =हाईकू = चित् चोर होते, श्री गुरु ‘अपने-से’ न और होते ।।स्थापना।। मुँह की खाये जन्मान्तक, चढ़ाने लाये उदक ।।जलं।। खाये ‘कि मुँह की बन्धन, चढ़ाने लाये चन्दन ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 514 =हाईकू= रहे न छुये बिना जादू, जादुई संगति साधु ।।स्थापना।। डराया डर ने, डर को डराऊँ, जल चढ़ाऊँ ।।जलं।। डर ‘कि लगे एक किनार, भेंटूँ चन्दन धार ।।चन्दनं।। डर […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 513 हाईकू ले सीढ़ी खड़ी माँएँ, जा बच्चे ‘कि छू आसमाँ जाएँ ।।स्थापना।। जल लाये, न खेल बन के रह जीवन जाये ।।जलं।। गंध लाये, न द्वन्द बन के रह […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 512 हाईकू आ पतझड़ जीवन में सन्त, ला देते बसन्त ।।स्थापना।। लाये चढ़ाने नीर, आप के जैसी रिझाने धीर ।।जलं।। लाये चढ़ाने गंध, आप के जैसा पाने आनन्द ।।चन्दनं।। लाये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 510 हाईकू अर्जुन भले न हम,एकलव्य से भी न कम ।।स्थापना।। कृपा ‘कि गुरु जी, आपकी पा जाऊँ, जल चढ़ाऊँ ।।जलं।। किरपा आप ‘कि दो बरषा, भेंटूँ चन्दन घिसा ।।चन्दनं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 511 हाईकू चुराई जाती, हँसी होंठो पे ‘ऋषि’ न यूँ ही आती ।।स्थापना।। पाप कपूर से धू-धू कर जायें, जल चढ़ायें ।।जलं।। भाव कि छू ‘भी’ तर सूनर जायें, गंध […]
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point
© Copyright 2021 . Design & Deployment by : Coder Point