परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 529 =हाईकू= और चेहरा भगवन् श्री गुरु वे तिन्हें वन्दन।।स्थापना।। यम-जन्म ‘कि हो छू-मन्तर, लाये जल इतर ।।जलं।। पाप-ताप ‘कि हो छू-मन्तर, लाये चन्दन अर ।।चन्दनं।। नेह-देह ‘कि हो छू-मन्तर, […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 529 =हाईकू= और चेहरा भगवन् श्री गुरु वे तिन्हें वन्दन।।स्थापना।। यम-जन्म ‘कि हो छू-मन्तर, लाये जल इतर ।।जलं।। पाप-ताप ‘कि हो छू-मन्तर, लाये चन्दन अर ।।चन्दनं।। नेह-देह ‘कि हो छू-मन्तर, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 528 “हाईकू”स्वप्नों में आने वाले ए ! अपनों में दे दो जगह।।स्थापना।। छोड़ते जल-धार,जनम ‘कि चित् हो खाने चार ।।जलं।। भेंटूॅं चन्दन न्यार,बन्धन ‘कि चित् हो खाने चार ।।चन्दनं।। भेंटूॅं […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 527 =हाईकू= हम तुम्हारे हैं, जब से नभ में चाँद तारे हैं ।।स्थापना।। जन्मान्तक हो गुम, लाये उदक, आये दृग् नम ।।जलं।। भौ-तपन हो गुम, लाये चन्दन, आये दृग् नम […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रमांक526 =हाईकू= नाम झपने का न ले पलक, पा तेरी झलक ।।स्थापना।। दो टूक हो ‘कि लौं-फरस, भेंटते जल-कलश ।।जलं।। दो टूक हो ‘कि भौ-बन्धन,भेंटते घट-चन्दन ।।चन्दनं।। दो टूक हो ‘कि […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 525 =हाईकू= तेरी मुस्कान, माटी के पुतले में भी फूँके जान ।।स्थापना।। घड़े जल ये रखे पाँव-पास, ले आशीष आश ।।जलं।। घट चन्दन ये रखे पाँव पास, ले छांव आश […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 524 -हाईकू-उसकी चाँद-चाँदी,जिसे आपने भक्ति “नौ-धा’ दी ।।स्थापना।। चढ़ाऊँ जल क्या, सारी ही निधि,पा आप सन्निधि ।।जलं।। दया जाये ‘कि बरस आया,घिस चन्दन लाया ।।चन्दनं।। आया ले हाथों में अक्षत,चाहत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 523 =हाईकू=जी-जी ने गुरु दर्श कीने,कीने भौ-पार सफीने ।।स्थापना।। स्वीकार लीजे जल कंचन, छीजे जन्म मरण ।।जलं।। स्वीकार लीजे घट चन्दन, छीजे झट बन्धन ।।चन्दनं।। स्वीकार लीजे अक्षत-कण, छीजे असत् […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 522 =हाईकू=अँगुली सभी, उसकी घी में, आप जा घर ‘जीमें’ ।।स्थापना।। चढ़ाते जल-कलश,बहस ‘कि जाय विहँस ।।जलं।। चढ़ाते घट चन्दन,‘कि विघटे वन-क्रन्दन ।।चन्दनं।। चढ़ाते दाने धाँ अक्षत, पदवी पाने शाश्वत […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 521 =हाईकू=गुरु दिल में रहना,चाहता न कौन कह…ना ।।स्थापना।। जन्म मृत्यु ‘कि बिलायें,घट जल-गंग चढ़ायें ।।जलं।। राग-द्वेष ‘कि बिलायें, घट जल-गंध चढ़ायें ।।चन्दनं।। मान-मोह ‘कि बिलायें, अखण्ड धाँ-शाली चढ़ायें ।।अक्षतं।। […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 520 *हाईकू* बिन स्वस्ति-ए-श्री गुरु, ‘कामयाबी’ न होती शुरु ।।स्थापना।। लाये उदक घट, जन्म-मृत्यु ‘कि जाये विघट ।।जलं।। लाये चन्दन घट, भवातप ‘कि जाये विघट ।।चन्दनं।। चढ़ाने लाये अक्षत, संकट […]
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