परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 549 =हाईकू= दूर से देखें, भक्तों को आते, ‘गुरु’ मुस्कुरा जाते ।।स्थापना।। जल ले, आया इसलिये, शरणा तेरी चाहिये ।।जलं।। गंध ले, आया इसलिये, संगत तेरी चाहिये ।।चन्दनं।। धाँ लाया, […]

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 549 =हाईकू= दूर से देखें, भक्तों को आते, ‘गुरु’ मुस्कुरा जाते ।।स्थापना।। जल ले, आया इसलिये, शरणा तेरी चाहिये ।।जलं।। गंध ले, आया इसलिये, संगत तेरी चाहिये ।।चन्दनं।। धाँ लाया, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 548 =हाईकू= और क्या, तेरा नाम ही तो गिनें, आ जा धड़कनें ।।स्थापना।। मेंट दो, भव पीर मोरी, अपना नीर कटोरी ।।जलं।। मेंट दो, देना गाँठ डोरी, अपना सुगंध घोरी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 547 =हाईकू=खुद से ज्यादा, रक्खें बच्चों का ध्यान माँएँ भगवान् ।।स्थापना।। उदक लाये,पाने आप की एक झलक आये ।।जलं।। चन्दन लाये,हित आप चरण-वन्दन आये ।।चन्दनं।। अक्षत लाये,‘कि झोली में पदवी […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 546 =हाईकू=है कोई,दोई जगत्,जगत खेवा,तो गुरुदेवा ।।स्थापना।। तेरे ही ‘हम’ले नीर खड़े द्वार,कीजे स्वीकार ।।जलं।। दृग् नम,‘हम’ले गंध खड़े द्वार,कीजे स्वीकार ।।चन्दनं।। अनुपम,ले हम,धाँ खड़े द्वार,कीजे स्वीकार ।।अक्षतं।। हम,द्यु-द्रुम,पुष्प ले, खड़े […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 545 “हाईकू” पाये छू रज, ‘पावन’ गुरु रोज आये ‘सूरज’।। स्थापना।। नवधा भक्ति सपना, लिये जल, लीजे अपना ।।जलं।। पड़गाहन सपना, लिये गंध, लीजे अपना ।। चन्दनं।। चरणोदक सपना, लिये […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 544 =हाईकू=तरु जी रहे,‘और-को’,‘और को’ ? जी गुरु जी रहे ।।स्थापना।। त्राहि माम् ! आँखें सजल,आया लिये हाथों में जल ।।जलं।। त्राहि माम् ! जल आँखों में,आया लिये गंध हाथों […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 543 “हाईकू” सभी कलाएँ, खेल-खेल में, देती सिखला माँएँ ।।स्थापना।। जल चढ़ाऊँ, ‘कि आप गन्धोदक फिर के पाऊँ ।।जलं।। गंध चढ़ाऊँ, ‘कि आप रज-पाँव फिर के पाऊँ ।।चन्दनं।। धाँ चढ़ाऊँ, […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 542 *हाईकू*तुम्हें देखते ही,‘दुःख-दर्द’ मुड़ देखते नहीं ।।स्थापना ।। खो जाये गुस्सा,भेंटूँ जल, लो बना मुझे खुद-सा ।।जलं।। खो जाये ईर्ष्या,भेंटूँ गंध, लो बना मुझे खुद-सा ।।चन्दनं।। खो जाये लिप्सा,भेंटूँ […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 541 =हाईकू=झरते आँखों से बोल,रिश्ता गुरु शिष्य अमोल।। स्थापना।। नीर चढाते भगवन् त्राहि माम्,भौ-तीर छकाते ।।जलं।। गंध चढ़ाते, भगवन् त्राहि माम्,ये बंध सताते ।।चन्दनं।। धान चढ़ाते,भगवन् त्राहि माम्,दुर्-ध्यान हराते ।।अक्षतं।। फूल […]
परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 540 =हाईकू= पा गया मैं, दो दुनिया की दौलत, पा द्वार तुम्हें ।। स्थापना।। सागर क्षीर, स्वीकार नीर, लगा दो नैय्या तीर ।।जलं।। अर सुगंध, स्वीकार गंध, झिरा दो कर्म […]
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