सवाल आचार्य भगवन् ! नेक चौके लगे रहते हैं आप एक चौड़े में पड़गाहन देकर, नेक दिल दुखाते है हर-रोज, स्वामिन् ! क्या ये एक युगपुरुष के लिये, उचित है रोजाना, सभी पे किरपा बरसे, क्या ऐसी जादुई शक्ति नहीं […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! नेक चौके लगे रहते हैं आप एक चौड़े में पड़गाहन देकर, नेक दिल दुखाते है हर-रोज, स्वामिन् ! क्या ये एक युगपुरुष के लिये, उचित है रोजाना, सभी पे किरपा बरसे, क्या ऐसी जादुई शक्ति नहीं […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मकड़ी के लार के जैसी लम्बी-लम्बी रातें सुनते हैं, पत, कीरत सार्थक नाम ‘खाई’ इसी एक अष्टापदी ने मिट्टी में मिलाई ऐसी ‘रातों में सिर्फ एक करवर से लेटना, कैसे होती होगी नींद पूरी, और दूसरे […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, मोक्ष मार्ग गिर पर चढ़ने जैसा है और स्वयं गिर शब्द कहता है गिरना ही गिरना और शिखर पर तो कोई देर तक, ठहर ही नहीं पाता है यहाँ तो समय का सूरज, उमर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके पीछे-पीछे भागने वाली, भीड़ का हिस्सा हूँ । हर रोज, सुबह-सुबह, आपके साथ चलता हूँ भगवन् ! हर रोज देखता हूँ, ‘के चलते-चलते, थोड़ी देर के लिए, भक्तों का सारा हुजूम, वगैर बिल्ली के रास्ता […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आज सन्त शिरोमणी सम्बोधन, छोटे-बाबा का पर्यायवाची नाम बन चला है, आपके लिये पा करके क्या सदलगा, क्या कर्नाटक, क्या दक्षिण-प्रान्त, सारा का सारा भारत-देश ही, धन्य हो गया है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, माँ श्री मन्ती जी पूछे, ‘के पीलू को कौन सा खेल पसन्द था, तो माँ कहती थी, गिल्ली डण्डा खेलना पूज्य पिता श्री मल्लप्पा जी, कहते थे, साइकिल चलाना श्रद्धेय बड़े भैय्या श्री महावीर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! नाम चरितार्थ करने ‘विपुल’ विपुलाचल पर्वत पर भगवान् महावीर स्वामी का समवशरण अनायास, अकारण आया था, मान लेते हैं भगवन्, ‘के तीर्थंकर भगवान् के कार्य अनिच्छ होते हैं पर असमीक्ष नहीं । किन्तु परन्तु भगवन् ! […]
सवाल आचार्य भगवन् ! बालक तीर्थंकर की माँ को दो नहीं, नौ नहीं, पूरे सोलह सपने देखने पड़े तब कहीं जाकर के कुछ अपूर्व पूर्व दिशा के भाँति हाथ लागा, भाग जागा, किन्तु परन्तु भगवन् माँ श्रीमन्ति का कितना पुण्य […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ऐसा क्या है, इस णमोकार मन्त्र में, ‘के देखा मैनें, ‘थोड़ा-बहुत पूर्व भव का पुण्य रहा होगा मेरा, आप हमारे गाँव आये हुये थे, ठण्ड़ी का समय था, आधी रात गई आप जैसे ही लेटने लगे, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आप दिन के बारह बजे ही नहीं, रात के बारह बजे भी, एक सैकेण्ड भी यहाँ वहाँ नहीं हो पाता है, और सामायिक करने के लिये बैठ जाते हैं भगवन् लेट-लतीफी डोरे नहीं डालती […]
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