सवाल आचार्य भगवन् ! आपके लिये दाँतों की असहनीय तकलीफ से होकर गुजरना पड़ा, क्या कारण रहा ? आपने उसे समता का परिचय देते हुए सहन किया, क्या सोचते थे आप, उस असाता वेदनीय कर्म के उदय के काल में […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! आपके लिये दाँतों की असहनीय तकलीफ से होकर गुजरना पड़ा, क्या कारण रहा ? आपने उसे समता का परिचय देते हुए सहन किया, क्या सोचते थे आप, उस असाता वेदनीय कर्म के उदय के काल में […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कागज-कलम आपके कर कमलों का इतना प्यार-दुलार पाते हैं ‘के थोड़ी इनमें ईर्ष्या सी होने लगती है इन के पास ऐसा क्या है भगवन् ? जो आपका मन मोह लेते हैं ये दोनों ? नमोऽस्तु भगवन्, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं महापुरुषों का कूर्मोन्नत पाँव होता है आचार्य श्री शान्तिसागर जी आचार्य श्री ज्ञान सागर जी का भी था, भगवन् ! कैसे मिलता है यह, और आपके पाँव के नीचे से जीवों को निकलते मुनिराजों […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते है, केशलोंच के बाद, दश दिन तक तो बाल दिखते ही नहीं, जड़ से जो टूटते हैं अब से लगा करके दो महीने गिनो तब भी ठीक है देखो ना मम्मी के पेट में जब […]
सवाल आचार्य भगवन् ! देेखते है, हर बार आचार्य ज्ञान-सागर जी महाराज के समाधि दिवस पर, आप गुरुदेव को कुछ न कुछ चेतन सुमन समर्पित करते हैं । सो भगवन् ! माँ गुरु मति नाम देके आपने, अपने गुरुदेव को […]
सवाल आचार्य भगवन् ! जब आप गिल्ली उठाने के लिए गुफा में गये थे, तब वहाँ एक मुनिराज को देखकर, उन्हीं उनके चरणो में दृष्टि देकर बैठ गये थे, तब उन्होंने आपको, भक्तामर जी के कुछ श्लोक सिखा, कल याद […]
सवाल आचार्य भगवन् ! गुरुणां-गुरु ज्ञान सागर जी ने, संघ को गुरुकुल बनाने की बात रखी थी, लेकिन आपने तो आज, संघ को कुल-गुरु बना दिया है क्या सिर्फ शब्द ही फेरने पड़े, या फिर, आप जिस दूसरी शाला की, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके प्रवचनों में सुना है, अद्भुत शब्द है ‘मालामाल’ और इससे जादुई शब्द है, माला महामन्त्र णमोकार इसकी एक माला के बाद, दी गई दूसरी माला पूरी हो ही नहीं पाती है, ‘कि जपने वाला मालामाल […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पाताल की लोहे के पिण्ड को भी, पल भर में गला देने वाली गर्मी, गर्मी के मौसम में, आँखें ऊपर चढ़ा कर, गर्दन कुछ दोनों कंधों से सटाकर, झाँकने लगती है, चूँकि धरती दरारें जो खा […]
सवाल आचार्य भगवन् ! करीब-करीब सुबह, पाँच बजे निकलते होगें ‘हर-बोलो’ उनके निकलने से पहले कैसे पता लगाते हैं आप ‘कि कितने बज चले, दिन में तो मान लिया, ‘कि सूरज की धूप से ज्ञात हो जाता होगा सो भगवन् […]
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