सवाल आचार्य भगवन् ! खूब बरसता है, चार महीने मूसल सी धार लगाकर, ताल, नदिया, सागर उफान पे रहते हैं पृथ्वी का दो तिहाई हिस्सा पानी से भरा पड़ा है ऐसा सहज सुलभ और दूसरा पेय पदार्थ कहाँ, फिर भी […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! खूब बरसता है, चार महीने मूसल सी धार लगाकर, ताल, नदिया, सागर उफान पे रहते हैं पृथ्वी का दो तिहाई हिस्सा पानी से भरा पड़ा है ऐसा सहज सुलभ और दूसरा पेय पदार्थ कहाँ, फिर भी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते हैं, घी ब्रह्म-रन्ध से सात पर्तों के भीतर जाकर स्वास्थ्य लाभ देता है किन्तु परन्तु आप तो सिर्फ तलवे में ही लगवाते हैं, घी या फिर तेल ऐसा क्यों भगवन् ! क्या आपका कुछ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मानते है बादाम दाम ज्यादा रखती है, उसे नहीं लेते न सही, पर भगवन् ! आम तो यथा नाम तथा गुण हैं ना, मतलब सीधा सीधा स्वामिन् ! आम लेना तो आजकल आम बात है कुछ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! नेकी का रास्ता आप खुद नापते हैं दीन-दुखियों के आँसू अपने हाथों से पोंछते हैं और अखीर में श्रेय परम पूज्य श्री ज्ञान सागर जी को दे देते हैं, ‘कि तू ही सब कराने वाला, मैं […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके घुटने साइकल चलाते वक्त, लहुलुहान हुये, जगह जगह जख्म जनमें, लेकिन फिर भी आप हाथ छोड़ के साइकल चलाते रहे सुुनते हैं, पिता मल्लप्पा जी ने भी कई दफा डाँटा, पर भी भगवन् ! क्या […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आजकल संहनन हीन पे हीन, होता चला जा रहा है और प्रकृति से खिलवाड़, जो कर रहा है, आज का मानव हा ! मौसम बेसमय का होता चला जा रहा है ऐसे समय में, भौतिकवादी हम […]
सवाल आचार्य भगवन् ! जैसे माँ बच्चों को दूर से ही, आता क्या देख लेती है स्वस्ति की लाईन लगा रही है उसी तरह आप भी, कोई आपको सिर झुकाये या न झुकाये आप आशीर्वाद के लिए हाथ उठाए ही […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, जब आप नव दीक्षित थे तब प्रतिक्रमण के समय, आपकी घनी, काली-काली दाड़ी, सीली-सीली हो जाती थीं, आँखें भर आती थीं क्यों, आचार्य श्री जी ऐसा क्या था ‘कि प्रतिक्रमण आपके नैन नम कर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! एक ही आसन से देर तक बैैठे रहते हैं आप, जब देखो तब लिखते, पढ़ते मिलते हैं आप सामने श्रावक लोग बैठे ही रहते है, जैसे हम लोग किसी केमरे के सामने जाते ही सावधान हो […]
सवाल आचार्य भगवन् ! देखा तो नहीं, पर सुना जरूर है, जब आप रात्रि विश्राम करते हैं, तो चेहरे पर यही चितचौर मुस्कान छाई रहती है जहाँ लोग विकृत ही आकृति के, सोते समय दिखते हैं कहीं लार मुँह से […]
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