सवाल आचार्य भगवन् ! आप एक दफा लिखने से पहले, कागज को तीन बार परिमार्जन करते हुये भी थकते नहीं हैं, क्या बात है, भगवन् ? और बाद में कायोत्सर्ग भी करते हैं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! आप एक दफा लिखने से पहले, कागज को तीन बार परिमार्जन करते हुये भी थकते नहीं हैं, क्या बात है, भगवन् ? और बाद में कायोत्सर्ग भी करते हैं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपने कभी आचार्य ज्ञान सागर जी के सामने, कोई प्रश्न उठाया है, या फिर नहीं, ये मैं ऐसा इसीलिये पूछ रहा हूँ, क्योंकि बच्चे तो सवालात उठाते ही रहते हैं और ज्ञान सागर जी माँ का […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ज्वार जवाहर है, मूँग मूँगा है, मक्का मुक्ता है, इन सबको तिलांजलि दे करके, पिता श्री मल्लप्पा जी गन्ना और कपास की खेती करते थे प्राय: करके, क्यों भगवन् ! कोई विशेष रहस्य छुपा है क्या […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप जब स्वाध्याय करते है, या फिर स्वाध्याय कराते है, तब सिंहासन पर बैठना तो दूर रहा, दूर-दूर तक उसे, देखना भी नहीं पसंंद नहीं करते हैं ऐसा क्यूँ भगवन् ! कोई विशेष राज की बात […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मोर के पंख की ही पीछि क्यों रखते हैं आप ? क्या कोमल, सुकुमाल रहती है इसलिये, या वजनी नहीं रहती है इसलिए, क्या बड़ी सुन्दर, मनहर बड़ी नयनहर रहती इसलिये क्या कारण है, कृपया कहिये […]
सवाल आचार्य भगवन् ! खुदबखुद ही कह रहा है, शब्द ‘विष…वास’ फिर भी आप, हर किसी पर विश्वास कर लेते हैं क्यों कर लेते हैं ? आचार्य भगवन् ! क्या आप विश्वास को वि-विशेष श्वास मानते हैं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके बाजोटे पर कभी पेन ‘नहीं’ देखा, पेंसिल ही दिखी हमेशा, वो भी सिर पर रबर लगाये हुये, क्या कोई विशेष बात है, स्वामिन् ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब देखिये, ग्राम वासी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! छोटी छोटी आँखों से हम सभी भक्त आपको टकटकी लगा देखते रहते हैं लेकिन इन बड़ी-बड़ी महापुरुषों के लाञ्छन वाली आँखों से आप, हम जैसे छोटे लोगों को नहीं देख पाते हैं, और खासकर पड़गाहन के […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पत्थर-मकराना कहता है ‘कि, ‘मैं इक राणा’ मैं पत्थरों का राजा हूँ और पीछे रहने वाला कब है, पत्थर संगमरमर कहता है, मेरा संगम अमर हैं, तो भगवन् ! जब आपके लिये जिनालयों को अमरता प्रदान […]
सवाल आचार्य भगवन् ! दिन भर एक ही आसन से बैठे बैठे आपकी कम्मर जवाब नहीं देने लगती है पल-पलक आप टिकते भी तो नहीं , भगवन् ! टिक तो जाया कीजिये दीवाल से, भगवन् ! क्यूँ नहीं टिकते हैं […]
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