सवाल आचार्य भगवन् ! जुबान से जो खुदबखुद कहती है हाँ…’री यानि ‘कि मुझे स्वीकार कर लीजिए, ऐसी हरी को आप नाम मात्र भी नहीं लेते हैं शरीर आपका अपना भले नहीं, ‘कल यहीं पर रह जायेगा, माना, लेकिन पड़ोसी […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! जुबान से जो खुदबखुद कहती है हाँ…’री यानि ‘कि मुझे स्वीकार कर लीजिए, ऐसी हरी को आप नाम मात्र भी नहीं लेते हैं शरीर आपका अपना भले नहीं, ‘कल यहीं पर रह जायेगा, माना, लेकिन पड़ोसी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आप बड़े-बुजुर्गों, गुरु की बात, किसी भी तरह की ना-कुकर किये बग़ैर, जल्दी ही मान लेते थे, आखिर क्यूँ गुरुजी, क्या आपका मन अपनी-अपनी नहीं चलाता था ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपको देखते ही सुध-बुध सी क्यों भूल जाते हैं, घर से जो सोचकर आते हैं ‘कि ये रहेंगे, वो पूछेंगे, और यहाँ आपकी सहजो-शान्त छवि को देखकर लगता है, बस और बस टकटकी लगा कर देखते […]
सवाल आचार्य भगवन् ! भैय्या महावीर तो आपका नाम लेकर, विद्याधर कह पुकारते थे, जानते थे, कुछ भी कर सकते हैं आप, लेकिन छोटे भाई अनंत और शान्ति तो आपको ‘भाई’ अर्थात् “बहुत भाते हैं आप मुझे” यह संबोधन देते […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप क्या कोई जादू-टोना जानते हैं पाई-पाई जोड़कर सेठ जी बने थे, हमारे गाँव की ही थे, एक सज्जन, उन्होंने कभी, एक रुपया दान न दिया था, लेकिन आप गाँव क्या आये, पाद प्रक्षालन की बोली […]
सवाल आचार्य भगवन ! सुनते हैं, बहिन भाई का रिश्ता एक । कभी न जो रिसता अभिलेख ।। तो भगवन् ! सिसकी भरती हुईं, अपनीं शान्ता, स्वर्णा यथा नाम तथा गुण अनुरूपा जीजिंयाँ कैसे मनाई आपने ये कह करके ‘के […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कमण्डल नारियल का ही क्यों रखते हैं आप, पीछी पीछे क्यों रखते हैं आप, और उपकरण एक-एक ही आपके पास दिखा जब कभी भी देखा, क्यों भगवन् ? नेक से जुड़ने का मन नहीं करता है […]
सवाल आचार्य भगवन् ! माँ तो आँखों में पानी भरे ही रखती है उसे आपने दैगम्बरी दीक्षा, मैं लेना चाहता हूँ, यह कैसे बतलाया था भगवन् ! कृपया बताईये कैसे मनाया था माँ का दिल तो बड़ा ही नाजुक होता […]
सवाल आचार्य भगवन् ! जिसमें आप ‘हाफ पेन्ट’ पहने हैं बस्ते को कंधे पर टागे हैं वो आपका फोटू बड़ा फबता है तो भगवन् ! प्रश्न मेरा यह है, ‘कि आज बच्चे का रंग न उड़ जाये, सो जन्म से […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आप मल्लप्पा जी से डरते थे, प्रायः करके सभी बच्चे अपनी मम्मी से भले न डरें, लेकिन अपने पापा के घर आने से पहले ही, अदब से पढ़ने बैठ जायेंगे, या फिर शोर-गुल बन्द […]
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