सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आपसे कोई मुसाफिर जैन मंंदिर की दूरी पूछता था, तो आप कहते थे इतने बार महामन्त्र पढ़ लो, आ जायेंगे मंदिर जी, और भी तो नाप हो सकते थे भगवन् ! आप वो क्यों […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आपसे कोई मुसाफिर जैन मंंदिर की दूरी पूछता था, तो आप कहते थे इतने बार महामन्त्र पढ़ लो, आ जायेंगे मंदिर जी, और भी तो नाप हो सकते थे भगवन् ! आप वो क्यों […]
सवाल आचार्य भगवन् ! अपनी आँखें खराब होने का डर नहीं लगता है आपको, भगवन् ! पहले से कोई व्यवस्था कर लेते हैं ऐसा मन नहीं करता आपका भगवन् ! ढ़लती उमर में, एक, भले साधारण सा हो, चश्मा तो […]
सवाल आचार्य भगवन् ! गोम्मटेश के दर्शन के समय, चढ़ाव पर आप खड़े हैं, श्री फल आपके हाथों की शोभा बढ़ा रहा है, द्रव्य की सुनहली पोटली दूसरे हाथ में है, वह फोटो जब-कभी ‘वायरल’ होता रहता है भगवन् ! […]
सवाल आचार्य भगवन् ! दाँत मर्कट कट-कट करने लगते हैं साँय साँय की आवाज करती, हवाएँ चलने लगती हैं, और मनमानी ओला, बरफ, पानी ऐसे में दिन तो, छिन सा गुजर जाता है भज सूरज, लेकिन स्याही रातें, और सुनते […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके हाथों की, हथेलिंयों के, गुरु आदि पर्वत, आकाश से जा लगते हैं, बताते हैं, बता दीजिये ना क्यों राज रखते हैं ? हम तो आपके अपने ही हैं, अपनों से क्यूँ छुपाते हैं हम किसी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सामुद्रिक शास्त्र प्रकाश डालते है ‘कि जो बड़े-बड़े युग-पुरुषों को, अपने जीवन के अन्तिम पड़ाव पर, नसीब होती है वो गज-रेखा, आपके पैरों में बचपन से ही है, क्या ये बात सही है स्वामिन् ! नमोऽस्तु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपने अपना प्रथम मुनि शिष्य, बड़े भाई अनन्त जी के लिए न बनाकर, छोटे भाई शान्ति जी के लिए, समय सागर जी नाम रखकर बनाया ? सो क्या राज था, ‘कि शान्ति जी से बड़े, अनंत […]
सवाल आचार्य भगवन् ! देवों का अपना जाता क्या है, विक्रिया से और रूप ही तो बनाना है ढ़ेरों ताँता लगाते खड़े रहते होंगे आपकी सेवा में, और सुनते भी हैं, आपके आस-पास देवि-देव रहते हैं क्या आपने कभी उन्हें […]
सवाल आचार्य भगवन् ! दिलों की चोरी, आपने किस मदरसे में जाकर सीखी ? आज दुनिया में ऐसा कोई नहीं, जो सिर्फ देखते ही, जी चुरा ले हाँ… काम से जी चुराने वाले मुलक मिलेंगे मुल्क-मुल्क में मिलेंगे, लेकिन आप […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कीड़ों की डरावनी आवाजें, रात्रि-जगरों का भूलना, बिल्लियों का रोना, जाने सार्थक नाम करती सी दोषाकर, रात्रि इतनी लम्बी-लम्बी फिर भी आप आधी रात गई लेटते हैं, और आधी रात रही उठ बढ़ते हैं तो आप […]
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