सवाल आचार्य भगवन् ! कभी आपने ऐसा सपना देखा, ‘कि आप आहार लेने निकलें हों, सारे गाँव में चौके लगें हों, लेकिन कहीं भी विधि न मिलने से, आपको उपाश्रम की ओर, मुस्कुराते हुऐ लौटना पड़ा हो ? नमोऽस्तु भगवन्, […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! कभी आपने ऐसा सपना देखा, ‘कि आप आहार लेने निकलें हों, सारे गाँव में चौके लगें हों, लेकिन कहीं भी विधि न मिलने से, आपको उपाश्रम की ओर, मुस्कुराते हुऐ लौटना पड़ा हो ? नमोऽस्तु भगवन्, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपको कई दफा बिच्छू ने काट खाया, भगवन् ! असहनीय बेदना हुई हो होगी सुनते हैं, बिच्छू का कांटा न सोता है, और न ही सोने देते है, सो रात-भर नींद न आई होगी कैसी अनुभूति […]
सवाल आचार्य भगवन् ! थर्मामीटर की हद को छूने वाला ज्वर आया था, तब आपने कैसे उसका सामना किया था बैठते तो बनता ही नहीं होगा, इस करवट के बाद और करवट राहत वाली महसूस होती होगी लेकिन हाय राम […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पिता मल्लप्पा जी ने, जब गिनी को पालने में खेलते हुऐ, आपने पैर का अँगूठा चूसते देखा, तो कहने लगे थे वह, सच पूत के लक्षण पालने में, ऐसा कहकर के पिता श्री जी, किस ओर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! बचपन में जब पीलू ने मंदिर जी में चढ़ी चढ़ाई चिटक रख ली थी तब माँ श्री मन्ती जी ने स्वयम्, प्रायश्चित रूप एक बड़ा कायोत्सर्ग किया था, श्वासो-श्वास सहित, और भगवन् ! प्राय: करके माएँ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! गुरुदेव ज्ञान सागर जी महाराज आपको उतना ही चाहते थे, जितना ‘कि आप उन्हें चाहते हैं, सुबह हो, दोपहर हो, शाम हो, बस एक यही गीत चरितार्थ होता है, ‘के “साँसों की माला सुमरूँ मैं, तेरा […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपने कभी किसी के भक्तों को फोड़ा हो, या ‘कि जोड़ा हो ऐसा कोई वाकया, आपको याद आ रहा हो, तो भगवन् ये हमारी विनय पर ध्यान दीजिए नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब […]
सवाल आचार्य भगवन् ! यूँ ही आपको, वर्तमान-वर्धमान नहीं कहते हैं सच आज कलिजुग में भी, आपका वर्धमान चारित्र है, भगवन् ! पर… एक जिज्ञासा है फूंक-फूंक कर भी, कदम भले ही क्यों न रक्खे जायें, काई तो फिसलाने में […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज, किसी वस्तु का त्याग करते थे, तो उसका विकल्प नहीं रखते थे यानि ‘कि छोड़ी चीज की जगह, पेट में छोड़ कर रखते थे, मतलब हर दिन ऊनोदर करके […]
सवाल आचार्य भगवन् ! दीक्षा की रजत क्या स्वर्ण जयंती निकलने को है, लेकिन देखते आ रहे है हम स्वयम्, आपके बाजोटे पर, गुरुणांगुरु ज्ञान सागर जी महाराज के द्वारा प्रदत्त वही धर्म ध्यान की पुस्तक, जीर्ण-शीर्ष रक्खी रहती है, […]
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