सवाल आचार्य भगवन् ! एक रात मैंने, सपने में आपको बस चलाते हुए, देखने का अक्षम्य अपराध कर लिया था भगवन् ! मैं बहुत गंदे सपने देखता हूँ, है…ना भगवन् क्योंकि आपने तो सवारी तक का त्याग करके रखा है […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! एक रात मैंने, सपने में आपको बस चलाते हुए, देखने का अक्षम्य अपराध कर लिया था भगवन् ! मैं बहुत गंदे सपने देखता हूँ, है…ना भगवन् क्योंकि आपने तो सवारी तक का त्याग करके रखा है […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आपके गरभ में आने के कारण, माँ का गौरव बढ़ गया था, उन्हें मान सम्मान कुछ हटके ही, पुर-परिजन लोग देने लगे थे क्या ऐसा होता है ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, आपका चरणोदक लगाते ही, एक दादी माँ की आँख फिर-के आ गई थी ये तो चमत्कार है ना भगवन् ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब सुनिये, आ…चरणोदक बोलिये चरण तो चार, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप दिग्गज सन्तों में से एक हैं आज आपका सानी पूरी दुनिया में नहीं है ऐसा प्रत्येक मंच एक सुर से घोषणा करता है ? आपको क्या लगता है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप तलस्पर्शी ज्ञान रखते हैं आपके आगे विद्वानों की बोलती बन्द हो जाती है, किसी की भी एक नहीं चलती आपके सामने, कैसा पुण्य है स्वामिन्, आपका सरसुति पुत्र हैं आप नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप अपने शिष्यों को, भगवान् महावीर स्वामी स्वामी कुन्दकुन्द, आचार्य ज्ञान सागर जी या आप स्वयं अपने जैसा ‘किस-सा’ बनाना चाहते हैं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब सुदूर सच्चा गुरु दूर अच्छा गुरु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कोई ज्ञानी ध्यानी, जब कभी आपने मिलने आते हैं जो आप बोलने की पहल नहीं करते हैं, भगवन् ! ये तो सुना था ‘कि फायर-ब्रिगेड जिसने पहले फायर कहा, ‘वह ‘बी’ ग्रेड का, लेकिन यहाँ तो […]
सवाल आचार्य भगवन् ! चतुर्थ काल में भक्ति काम करती थी, आज तो पैसे की शक्ति काम करती है, शबरिंयाँ अपने राम की, राह ही देखती रह जाती हैं आज ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब सुनो, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कभी किसी की बढ़ती को देखकर, उसे नीचा दिखाने का भाव, आपके मन में भी आता है, क्या ? क्योंकि पर प्रशंसा पचाना, कोई छोटी मोटी नहीं बात । होती वो, दूसरी ही कोई बड़ी-छोटी आँत […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, माँ श्री मन्ती और पिता मल्लप्पा जी, अक्कीवाट में विद्यासागर महाराज की. समाधि पर मन्नत लेके गये थे, तब आप उनकी गोद में आये थे शरद् पूनम के चाँद बनकर के, क्या ऐसा भी […]
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