पद्मप्रभ वृहद चालीसा दोहा जल विभिन्न रह पद्म से, कीना सार्थक नाम । देवदेव प्रभु पद्म वे, कोटिक तिन्हें प्रणाम ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली । वत्सिक, देश सुसीमा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम वहाँ […]
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पद्मप्रभ वृहद चालीसा दोहा जल विभिन्न रह पद्म से, कीना सार्थक नाम । देवदेव प्रभु पद्म वे, कोटिक तिन्हें प्रणाम ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली । वत्सिक, देश सुसीमा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम वहाँ […]
सुपार्श्व नाथ वृहद चालीसा दोहा स्वर्ण लोह पारस करे, तुम करते निज भाँत । तभी नाम तुम पड़ चला, देव सुपारस नाथ ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली । देश सुकच्छ, क्षेमपुर नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । […]
चन्द्र-प्रभ चन्द्र-प्रभ वृहद चालीसा ‘दोहा’माथे कलंक चन्द्रमा,आप चरित निष्कलंक ।खुद जैसा कर लो हमें,स्वर्ण यम-जनम-पंक ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली ।मंगल रत्न संचयन् नगरी ।।भव यह पिछला तीजा जानो ।पद्म नाभि नृृप नाम पिछानो ।।१।। वर्ण, स्वर्ण के जैसा […]
सुविध नाथ वृहद चालीसा ‘दोहा’ ‘सुविध’ साध एक आत्मा, कीना सार्थक नाम । विध-बंधन दो टूक हों, ले यह भाव प्रणाम ।। चौपाई ‘पुष्कर’ अर्ध’ पूर्व वैदेहा । पुर पुण्डरीक निस्संदेहा ।। भव यह पिछला तीजा जानो । महापद्म नृप […]
शीतलनाथ वृहद चालीसा दोहा आ बाहर कभी स्वप्न से, दे दो आशीर्वाद । दूजी और मुराद ना, ना कोई फरियाद ।। चौपाई नगर सुसीमा ‘वत्स’ सनेहा । पुष्कर-अर्ध-पूर्व वैदेहा ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम वहाँ सिद्धार्थ पिछानो […]
श्रेयो-नाथ वृहद चालीसा दोहा जिन श्रेयस् बिन आपके, सुनता कौन पुकार । लगा भक्त ताँता कहे, आप दया अवतार ।। चौपाई पुष्कर पूर्व अर्ध वैदेहा । देश सुकच्छ, क्षेम ‘पुर’ गेहा ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम नलिन […]
वासु-पूज्य वृहद चालीसा दोहा बड़े इन्द्र सब है खड़े, सविनय जोड़े हाथ । वासुपूज्य जिन देव जी, नाम आपका सार्थ ।। पुष्कर अर्ध पूर्व वैदेहा । ‘रत्न-संचयन्’ वत्स सनेहा ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नृप पद्मोत्तर नाम पिछानो […]
विमल नाथ वृहद चालीसा दोहा विमल विमलतर बह चली, परिणामों की धार । दूर कहाँ वह तीर था, पलक झपकते पार ।। चौपाई पूरब भरत धातकी विरली । देश वत्सकावत ‘मह’ नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । पद्म […]
अनन्त नाथ वृहद चालीसा ‘दोहा’ निज भक्तों पे आपकी, बरसे करुणा ‘नन्त’ । सुन ! नापूँ उस वक्त से, आप भक्ति इक पन्थ ।। चौपाई जम्बू पाश्च-इरावत विरली । रम्यक देश अरिष्टा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । […]
धर्मनाथ धर्मनाथ धर्मनाथ‘वृहद्-चालीसा’ दोहा‘धर्म’ मान निज भक्त को, करता कोई पार । सिर्फ आप इक नाम से, रही सुशोभ कतार ।। चौपाई पूर्व विदेह धातकी विरली | वत्सिक देश, सुसीमा नगरी ।।भव यह पिछला तीजा जानो ।नाम यहाँ दशरथ पहचानो […]
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