सवाल आचार्य भगवन् ! दुनिया न सिर्फ कहती है, बल्कि यही करती भी है ‘के जैसे को तैसा, यानि ‘कि जो नफरत करें, उसके साथ नफरत से पेश आना है और स्नेह करने वाले को नेह लुटाना है पर आप […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! दुनिया न सिर्फ कहती है, बल्कि यही करती भी है ‘के जैसे को तैसा, यानि ‘कि जो नफरत करें, उसके साथ नफरत से पेश आना है और स्नेह करने वाले को नेह लुटाना है पर आप […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, समय से पूर्व ही रावण जैसे लोगों को सिद्धियाँ हो चलीं पर आज तो रिद्धि-सिद्धि जुड़वा बच्चिंयों के नाम बस रह गये हैं । नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब गरभ से […]
सवाल आचार्य भगवन् ! जैनागम में पात्रों के लिये ही दान देने की बात कही है सो क्या विशेष कारण है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब ‘दान’ आ की मात्रा लगाई ‘कि पहला दान आया आहार बाद […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आज रात मैंने एक सपना देखा ‘के आप अपने कानों को बार-बार पकड़ रहे हैं बार-बार अपनी गर्दन को मना करने की मुद्रा में हिला रहे हैं भगवन् क्या राज था छुपा उसमें नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! क्या धर्म के ठेकेदार सिर्फ पैसे वाले, काले अक्षर पढ़ लेने वाले दिमाग से छलांगें भर लेने वाले ही हैं या सीधे-सादे लोगों के लिए भी कोई स्थान है. नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप छह-छह घड़ी की, बड़ी बड़ी सामायिक करते है मुनिराजों के मुखारविंद से प्रवचनों में सुना है हिलते, डुलते भी नहीं आप, भगवन् मनोवैज्ञानिक कहते हैं ‘कि हमारा मन वही काम फिर-फिर करता है, तो रस […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके प्रवचनों में, सुना है ‘कि भगवान् पारस नाथ जी ने, इस वर्तमान भव में क्या, दश भवों से लेकर कभी भी, कमठ के जीव को दुश्मन नहीं समझा न ही दुश्मनी रखी, तो मेरे भगवन् […]
सवाल आचार्य भगवन् ! खूब देखा है, हम गलत नहीं हैं, फिर भी, गलत ही ठहरा देती है, दुनिया हमें भगवन् ! नेक दिल इंसान अच्छे नहीं होते है क्या ? क्यूॅं पत्थर दिल हावी हो जाते हैं कभी-कभी मन […]
सवाल आचार्य भगवन् ! खबर उड़ाने वालों की कमी नहीं है दीवाल से कान सटाये रहते है, न सिर्फ पराये हमसाये भी, ये मोबाइल क्या चल पड़े, बातें रिकार्ड हो चलीं भगवन् ये जाल बिछाने वाले कब आयेंगे जाल में, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपके प्रवचनों में घना-घना सुनने में आता है ‘सबसे भली चुप’ ‘तोल मोल के बोल’ समां मौन, ‘न तीन भौन’ स्वामिन् ! क्या इतना कीमती है चुप रहना ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… […]
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