सवाल आचार्य भगवन् ! आपका आहार चालू नहीं हो पाता है और आप हथेली पर अँगुली रख कर इशारा करने लगते है ‘कि ‘सौंप भगवन् मानते हैं, मुख शुद्धि के लिये आवश्यक होती है सौंप सौंप देंगे श्रावक-जन इतनी जल्दी […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! आपका आहार चालू नहीं हो पाता है और आप हथेली पर अँगुली रख कर इशारा करने लगते है ‘कि ‘सौंप भगवन् मानते हैं, मुख शुद्धि के लिये आवश्यक होती है सौंप सौंप देंगे श्रावक-जन इतनी जल्दी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, ‘जननी जन्म भूमिश्च, स्वर्गादपि गरीयसी’ और भगवान् कर्नाटक की सरजमीं आपका पलकें बिछाए, आंखें भिंजाए बड़ी बेशबरी से इंतजार कर रही है लेकिन आप हैं ‘कि आंख उठा के भी उस तरफ देखते ही […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पर्वराज पर्युषण में जहाँ आप रहते हैं, वहाँ कोई प्रतियोगिता क्यों नहीं होती है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब न सिर्फ कह रही है प्रति…योग ऽत: होनी ही चाहिये बल्की रुक रुक के […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पहले के जैसी भक्ति कहाँ खो चती है जब भगवान् भक्त के घर आते थे ‘के कुछ ले लो भाई आज तो भक्त भगवान् का द्वार ही खटखटाता रहता है क्या भगवान् ने अपना अता-पता बदल […]
सवाल आचार्य भगवन् ! रात मेरे सपने में आप आये थे आपका समोशरण लगा हुआ था उसमें एक पत्र पढ़ा जा रहा था जो एक ग्रामीण भाई ने अपने शहरी भाई के नाम लिखा था भगवान् मैं भूल चला हूँ, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! एक दिन आपके प्रवचनांश पढ़ रहा था दिखाई दिया लिक्खा, ‘के जड़ सार्थक नाम रखती है जिस तरफ जर यानि ‘कि सम्पति छुपी रहती है उसी तरफ बढ़ती है जड़ तो भगवन् ! एकेन्द्रिय जड़ की […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं, कहती है, सफलता तू सफल था और चूँकि सफल था, तो रास्ता जो देख लिया है, तो सफल है और अब जब सफल है, तब सहज ही कल भी सफल रहेगा ऐसी वह छटी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! अब तक तो ठीक था, आप लड़के बच्चे लेते थे माना लाड़के थे, लेकिन घर में लड़ते झगड़ते भी थे लेकिन अब साथिया का क्या होगा आप साधिका जो बनाने लगे हो, लड़के बच्चे लाठी, चश्मे […]
सवाल आचार्य भगवन् ! बिजली से जन्म दिला पतंगे को घड़ी अगली छिपकली के मुख का निवाला बना दिया वक्त उसी सर्प की लपलपाती जिह्वाओं के, वशीभूत कर दिया छिपकली को और प्रकृति ओ ! अभी तुम न बाज आईं […]
सवाल आचार्य भगवन् ! दादी, नानी की किस्सों का मन्थन करने पर नवनीत बाहर निकलता है चीजें एक छोर से छुओ दूसरे नेक छोर से अनछुई रह जाती हैं इसलिये ‘के फैसले सही हों, न सहीं किसी दूसरे को, स्वयं […]
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