सवाल आचार्य भगवन् ! हवा के अक्षर पलटते ही वा…ह निकला पर भगवान् ये वाह कहता कौन इससे नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब कोन-कोन यही कहता है काम इच्छा ना करो काम अच्छा सा करो खुशबू चार […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! हवा के अक्षर पलटते ही वा…ह निकला पर भगवान् ये वाह कहता कौन इससे नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब कोन-कोन यही कहता है काम इच्छा ना करो काम अच्छा सा करो खुशबू चार […]
सवाल आचार्य भगवन् ! लोग-बाग हाथ धो करके पीछे पड़े रहते हैं तंग करने मुझे, क्या करूॅं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब पड़े चाँद के पीछे, कम ना-जन उड़ा ले आती कहीं से, बादलों को वायु तो […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते है चिंटिया बड़ी समझदार रहती है है हम समॅंझधार नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब पर… विरले आने पर चिंटिया बाग-बाग नहीं होती भाग भाग नहीं रोती चिंटिया पर… चले जाने पर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! गुरु पूर्णिमा का आप हटके ही अर्थ लेते हैं ‘के गुरु पूर्ण, माँ है जिसने हमें जनम दिया दर दर न भटक कर उसी की सेवा करो चार धाम से बढ़ के है माँ अद्भुत सोच […]
सवाल आचार्य भगवन् ! खूब उठा-पटक करने में लगी है दुनिया, मेरा मन भी रातों रात, हाथों हाथ बड़ा आदमी बनने के सपने देखने में पीछे नहीं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब देखिये, ध्यान रखिये ‘स’ माने […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मन कहता है भूल कहती है भूल चलो भगवन् ! भूल कहाँ तक क्षम्य है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब हाईकू छोटी से छोटी मानो अपनी भूल मोटी से मोटी भूगोल उसकी भूल […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कोई गाँठ बाँधने के लायक बात बतलाईये नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब गर्दन उठा करके देखने से दिख तो दूर तक का जाता है, पर हमारा कद जो देखने वालों की आँखों में […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मन दूसरों की लकीर मिटा करके लकी बनना चाहता है और लकीर में है भी लकी शब्द रबर का ‘र’ भी मिटाने के लिये ही पूर्वजों ने रक्खा होगा ऐसा हवाला भी देता है कैसे समझाऊँ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मन सहजो-निराकुल बन चले, कोई नुख़्सा बतालाई नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब हाईकू पता ? कहता म…न न…म के रहो अहो सजन ! भाई ! अकड़ अ…कड अहो ! कहती अकड़, जो मैं […]
सवाल आचार्य भगवन् ! जब पंचम काल में मानव मिथ्यात्व के साथ ही धरा पर धरा जाता है और सम्यक् दृष्टिपना परसेन्ट में सही, अंगुली का नाम अनामिका रखने तत्पर है । जिसकी सीमा में आप जैसे त्यागी तपस्विंयों का […]
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