सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ दे धका क्यूँ निकालते घर से पढ़ी गो दूसरे ही मदरसे दो गज आवास लेती है लेने के नाम पे पानी और घास लेती है और छप्पर फाड़ के देती है लकीर बढ़ाती अपनी […]
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सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ दे धका क्यूँ निकालते घर से पढ़ी गो दूसरे ही मदरसे दो गज आवास लेती है लेने के नाम पे पानी और घास लेती है और छप्पर फाड़ के देती है लकीर बढ़ाती अपनी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ गाय धन, गाय धन, गाय धन घास-फूस खा रही । दूध घी खिला रही ।। कामगो ! अचिन्त्य मण । गाय धन, गाय धन, गाय धन ‘सी’ ‘ओ टू’ दे रही । ‘सी ओ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आने वाले वेगों के समय, पल पलक ठहरने के लिये क्यों कहते हैं आप, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब तू पल पलक तो रुक यह पीछे पड़ा जो दुख वह जायेगा निकल आगे […]
सवाल आचार्य भगवन् ! हम सीधे हों और किसी को दिखते टेड़े हो तो क्या करना चाहिए नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब हम सीधे हों और किसी को दिखते टेड़े हो तो समझना देख पराई पीर आँखों […]
सवाल आचार्य भगवन् ! किसी को कहाँ तक रोका टोका जाये नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब बुरी जिद का, सुबह सुबह न करते जो मुहँ काला मिल ही जाता साँझ तलक कोई न कोई टोकने वाला मत […]
सवाल आचार्य भगवन् ! कितना नादान है इंसान ज़िन्दगी की राह में कॉंच किरात कांटे दो पांच क्या देखता शू-साईड कर लेता है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब कॉंधा देने की जगह अपना काँधा लगवाना पापा के […]
सवाल आचार्य भगवन् ! पूजन सुबह सुबह क्यों करना चाहिए नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब चिड़िया चहकती बेवजह बगिया महकती सुबह-सुबह उठ हर्र बगैर फिटकरी लाने चोखा रंग आ हो-ले भगवत् नाम संग सौरभ, सुरभी सुगन्धी चाहिये […]
सवाल आचार्य भगवन् ! नदी बेसुध होकर खारे सागर से मिलने बेकरार क्यों रहती है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब स… मन्दर कोई सत्य-शिव-सुन्दर तो समन्दर जो बिना अन्तर अपना अन्तर् लौटी नहीं, ‘कि लौटा-लौटा लहर करता […]
सवाल आचार्य भगवन् ! सुनते हैं मॉं श्रीमन्ती जी बड़ी अच्छी प्रभाती गातीं थीं कोई एकाध अच्छी सी सुना दीजिए ना नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब रात खो चली, उठ भी जाओ सुनो सुबह हो चली, उठ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! चेहरे पर चेहरे लगाये रखता दुनिया ऐसा कहकर उलाहना देती है वहीं आप प्रशंसा के पुल बांधते बांधते नहीं रखते चन्द्रमा के सो सोच क्या रखते हैं आप नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब […]
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