सुपार्श्व नाथ आरती जिनेन्द्रम् सुपारस, जिनेन्द्रम् सुपारस । सदा यूँहि...
पद्म-प्रभ आरती जयतु जय जय पद्मप्-प्रभ देव । सतत शत इन्द्र खड़े हित सेव ।।...
सुमतिनाथ आरती जयतु सुमत जय जय । दृग् नम सदय हृदय ।। उतारुँ आरतिया करने पापों...
अभिनन्दन नाथ आरती अभिनन्दन, शत शत वन्दन । भगवन् अर्हन अभिनन्दन ।। कर आरति...
संभवनाथ आरती आरती संभव जिन । मैं उतारूँ निश-दिन । बाती कपूर वाली । मण रत्नों...
अजितनाथ आरती जय जिन अजित, अजित जिन जय-जय । करे आरती कर्म सभी क्षय । हरे आरती...
श्री १००८ आदिनाथ भगवान्आरती थाल सजाओ । ज्योत जगाओ ।।आदि ब्रह्म की आरती,...
आदिनाथ ‘वृहद्-चालीसा’ दोहा लगा रहे काँधे बिठा, भवि भक्तों को पार । गूॅंज...
अजित ‘वृहद्-चालीसा’ दोहा मुकुट बद्ध राजा सभी, खडे़ माथ रख हाथ । जन्म समय...
संभवनाथ वृहद चालीसा दोहा स्वस्ति झिर चली नाम से, फूटे ज्यों गुल गन्ध । जिन...
अभिनन्दन नाथ वृहद चालीसा दोहा अभिनन्दन गुण गण किया, कर अवगुण अवसान । यूँ ही...
सुमतिनाथ वृहद चालीसा दोहा नाम सुमत रख, कर चली, माँ मत-हंसी साथ । बात कुछ...
