शांति नाथ वृहद चालीसा ‘दोहा’ एक प्रदाता शान्ति के, शान्ति-नाथ भगवान् । श्रृद्धा-सुमन चढ़ा रहा, यूँ ही न तीन जहान ।। चौपाई ‘जम्बू’ पूर्व-विदेहा विरली । पुष्क-वत पुण्-डरीक नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम मेघरथ यहाँ पिछानो […]

शांति नाथ वृहद चालीसा ‘दोहा’ एक प्रदाता शान्ति के, शान्ति-नाथ भगवान् । श्रृद्धा-सुमन चढ़ा रहा, यूँ ही न तीन जहान ।। चौपाई ‘जम्बू’ पूर्व-विदेहा विरली । पुष्क-वत पुण्-डरीक नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम मेघरथ यहाँ पिछानो […]
कुन्थु-नाथ वृहद-चालीसा ‘दोहा’ कुन्थ-आदि की कर रहे, निस्पृह साज सॅंभाल । वहीं आदि में मैं छुपा, रखना मेरा ख्याल ।। चौपाई ‘जम्बू’ पूर्व विदेहा विरली । वत्सिक देश सुसीमा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम यहाँ ‘सिंहरथ’ […]
अरह-नाथ वृहद-चालीसा दोहा अर यानी तुम नाम है, कुछ हटके तिहु-लोक । काम बना होगा तभी, जन-जन देता ढ़ोक ।। चौपाई ‘जम्बू’ पूर्व-विदेहा विरली । कच्छ देश पुर-क्षेमा नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम यहाँ ‘धनपति’ पहचानो […]
मल्लि-नाथ वृहद-चालीसा दोहा सुना लगाते पार हो, काँधे बैठा आप । रसिक न यूँ ही ‘जग-जुबां’, ‘जयतु मल्ल-जिन’ जाप ।। चौपाई ‘जम्बू’, पूर्व विदेहा विरली । वत्स-देश ‘बित-शोका’-नगरी ।। भव यह पिछला तीजा जानो । नाम यहाँ वैश्रवण पिछानो ।।१।। […]
मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथवृहद-चालीसा दोहादुखिंयों के दुख मेंटने, सहज सदा तैयार । मुनि सुव्रत भगवान् वे, जिन्हें नमन शत बार ।। चौपाई जम्बूद्वीप भरत भू विरली ।अंग-देश चम्पापुर नगरी ।।भव यह पिछला तीजा जानो ।नाम वहाँ श्री-धर्म पिछानो ।।१।। […]
सवाल आचार्य भगवन् ! क्या सूर्य, क्या भोर, क्या विभोर क्या ब्रह्म-मुहूर्त, क्या आधी रात, भगवन् ! आपको किसी ने भी आज तक, पैर पसारे नहीं देखा । स्वामिन् क्या राज है क्या आपको थकान परेशान नहीं करती है नमोऽस्तु […]
सवाल आचार्य भगवन् ! लोग-बाग आपके प्रवचन, मंत्र मुग्ध होकर सुनते रहते हैं, सुनने के बाद सभी को कहते सुना है, ‘के आज का प्रवचन तो मेरे ही ऊपर था आचार्य भगवान् ने मेरे सारे प्रश्नों का उत्तर, बिना प्रश्न […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आपकी आँखों में जब-तब करुणा ही एक, स्थाई निवसी रहती है, भगवन् ! ऐसा क्या है करुणा में, जिसे आपने हृदय में स्थान दिया है जिसकी परछाई आँखो में दिखाई देती है चूँकि हृदय तक रास्ता […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मारुति जी आपके बाल सखा हैं बड़े ही सीधे-साधे, सरल हृदय सहज-निराकुल व्यक्तित्व के धनी हैं सुनते हैं आप बचपन से ही इनका नाम राम से भी ज्यादा जुबाँ पर फेरते रहते थे क्यों भगवन् ! […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आप दिन रात पढ़ाते हैं शिष्यों को लेकिन परीक्षा न मौखिक लेते हैं और न हीं लिखित ही फिर आप अपने बच्चों की योग्यता, कैसे समझते है ? कैसे परखते हैं, आप उन्हें नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु […]
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